Friday, 31 July 2026

कोई आवाज दूसरी आवाज को न दबाए, यही मध्यस्थता का मूल सिद्धांत: सीजेआई सूर्यकांत


कोई आवाज दूसरी आवाज को न दबाए, यही मध्यस्थता का मूल सिद्धांत: सीजेआई सूर्यकांत

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जयपुर में तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन, न्यायविदों ने विवाद की जगह संवाद और समझौते की संस्कृति अपनाने पर दिया जोर

जयपुर। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता का मूल सिद्धांत यह सुनिश्चित करना है कि विवाद के दौरान किसी एक पक्ष की आवाज दूसरे पक्ष की आवाज को दबा न सके। सामाजिक सौहार्द के सिद्धांत पर बसाए गए जयपुर को इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए उपयुक्त स्थान बताते हुए उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक मध्यस्थता व्यवस्था के बीच जुड़ाव पर जोर दिया।

मुख्य न्यायाधीश शुक्रवार को टोंक रोड स्थित होटल द ललित में आयोजित तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन 31 जुलाई से 2 अगस्त तक चलेगा और इसका विषय ‘पीस मीडिएशन एंड द रूल ऑफ लॉ’ है। सम्मेलन के अंत में प्रस्तावित ‘जयपुर डिक्लेरेशन ऑन पीस मीडिएशन’ को स्वीकार किए जाने की योजना है। सूर्यकांत ने 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

ग्राम पंचायतों की मध्यस्थता परंपरा का किया उल्लेख

सीजेआई ने कहा कि औपचारिक कानूनी व्यवस्था और वकीलों की व्यापक उपलब्धता से पहले गांवों में पंचायतें मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान करती थीं। समझौता कराने वाले लोगों की जिम्मेदारी केवल विवाद खत्म करने तक सीमित नहीं होती थी, बल्कि उन्हें बाद में भी उसी समाज का नेतृत्व करना होता था।

उन्होंने कहा कि इस कारण समझौता केवल कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि पक्षों के बीच विश्वास बहाल करने और सामाजिक संबंध बनाए रखने की प्रक्रिया भी था।

52 कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में 52 कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि कॉमनवेल्थ संगठन में वर्तमान में कुल 56 सदस्य देश हैं।

कार्यक्रम राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थों की संस्था ‘निवारण’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

मध्यस्थता से मामलों के निस्तारण में राजस्थान दूसरे स्थान पर

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और न्यायिक संस्थाओं में विश्वास मजबूत करने के माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आधुनिक न्यायिक व्यवस्था केवल फैसला सुनाने वाली नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें समाज के अंतिम व्यक्ति की भागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता के जरिए मामलों का निस्तारण करने में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है।

तुषार मेहता ने रामायण और महाभारत के प्रसंग सुनाए

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारतीय परंपरा में संघर्ष शुरू होने से पहले समझौते का प्रयास करने को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने रामायण में युद्ध से पहले अंगद को दूत बनाकर भेजने और महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण के शांति प्रस्ताव का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की सफलता के लिए दोनों पक्षों में समाधान स्वीकार करने की इच्छा होना भी जरूरी है। किसी पक्ष के समझौते के लिए तैयार नहीं होने पर मध्यस्थ के प्रयास सफल नहीं हो सकते।

‘विवाद की जगह संवाद की संस्कृति अपनाएं’

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने पंच परमेश्वर की परंपरा को भारत में मध्यस्थता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इसी परंपरा से आगे बढ़ते हुए भारत अब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

मेघवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, इंडस्ट्री 4.0 और सीमा पार व्यापार के विस्तार से कानूनी विवादों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में जटिल विवादों के समाधान के लिए आधुनिक, प्रभावी और भरोसेमंद मध्यस्थता प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संवाद से मिलने वाला न्याय समाज को अधिक शांतिपूर्ण बनाता है और मजबूत विधिक व्यवस्था से लोकतंत्र तथा अर्थव्यवस्था दोनों सशक्त होते हैं।

मध्यस्थता से समय, धन और संबंधों की बचत: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया में कई बार पक्षकारों का समय, धन और संपत्ति खर्च हो जाती है, लेकिन वर्षों तक विवाद का समाधान नहीं हो पाता। मध्यस्थता के माध्यम से कम समय में ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार करें।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में पंचायतें परंपरागत रूप से केवल विवाद समाप्त नहीं करती थीं, बल्कि पक्षों के बीच उत्पन्न कड़वाहट को भी दूर करने का प्रयास करती थीं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में अब तक 5.85 लाख लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।

कुछ महीनों में संभव है विवाद का समाधान

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने कहा कि अदालत में पहुंचने वाले मामलों के निस्तारण में कई वर्ष लग सकते हैं, जबकि मध्यस्थता के माध्यम से अनेक विवादों को कुछ महीनों में सुलझाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता में समाधान पक्षकारों की सहमति से तैयार होता है। इससे फैसले की स्वीकार्यता बढ़ती है और भविष्य में दोबारा विवाद की आशंका भी कम होती है।

देश-विदेश के न्यायविद हुए शामिल

उद्घाटन सत्र में जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश आभा नायर पटेल, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता एवं विजय विश्नोई सहित अनेक न्यायविद उपस्थित रहे।

सम्मेलन में श्रीलंका, बहमास, सिंगापुर, जिम्बाब्वे, यूनाइटेड किंगडम, मलेशिया, बांग्लादेश, इस्वातिनी, केन्या और मालदीव सहित विभिन्न देशों के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, अटॉर्नी जनरल और विधि विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

जयपुर डिक्लेरेशन में तय होंगे मध्यस्थता के भावी सिद्धांत

तीन दिवसीय सम्मेलन में पारिवारिक, वाणिज्यिक, आपराधिक, कार्यस्थल, जलवायु, सामुदायिक और अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता की भूमिका पर विचार-विमर्श होगा। आधिकारिक सम्मेलन विवरण में भी इन क्षेत्रों को चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल किया गया है।

सम्मेलन के समापन पर प्रस्तावित ‘जयपुर डिक्लेरेशन ऑन पीस मीडिएशन’ के माध्यम से कॉमनवेल्थ देशों में मध्यस्थता और विधि के शासन को मजबूत करने के लिए साझा सिद्धांत तय किए जाने हैं।

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