



बाजार बंद होने से व्यापारियों, हमालों, चारा विक्रेताओं और वाहन चालकों की आजीविका प्रभावित होने का दावा, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
टोंक। अस्थायी पशु हाट बाजार को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को पशु व्यापारियों और पशुपालकों ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर टीना डाबी को ज्ञापन सौंपकर बाजार का संचालन शीघ्र शुरू कराने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि हर्ष एंटरप्राइजेज, टोंक की ओर से संचालित अस्थायी पशु हाट बाजार प्रशासनिक आदेश के बाद बंद है। उनका दावा है कि बाजार बंद होने से पशु व्यापार से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
पशु व्यापारियों ने कहा कि बाजार से केवल पशु विक्रेता ही नहीं, बल्कि हमाल, चारा विक्रेता, वाहन चालक और अन्य छोटे कारोबारी भी जुड़े हुए हैं। बाजार नहीं लगने से इन सभी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पशुपालकों और किसानों को भी पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए उचित और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध नहीं हो पा रहा। इससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी और खर्च का सामना करना पड़ रहा है।
जिला कलेक्टर के नाम दिए गए ज्ञापन में व्यापारियों ने आरोप लगाया कि नियमित पशु बाजार नहीं लगने के कारण हाईवे और अन्य स्थानों के किनारे पशुओं की अनियंत्रित एवं कथित अवैध खरीद-बिक्री हो रही है।
व्यापारियों का कहना है कि इससे सड़क सुरक्षा से जुड़ी समस्या पैदा होने के साथ सरकार को मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से नियमानुसार बाजार संचालित करने की अनुमति देने की मांग की।
ज्ञापन देने से पहले पशु व्यापारी और पशुपालक गांधी पार्क स्थित हनुमान मंदिर के पास एकत्रित हुए। यहां से वे नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और बकरा मंडी सहित अस्थायी पशु हाट बाजार शुरू कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रशासन को आजीविका, पशुपालकों की सुविधा और सरकारी राजस्व—तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर टीना डाबी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार जिला कलेक्टर ने मामले की जांच कर नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
ज्ञापन देने वालों में बुद्धि प्रकाश पहाड़िया, सरफराज, हीरालाल, मुन्ना, विनोद पहाड़िया, कालू, मुकेश और राजेश चंदेल सहित अन्य पशु व्यापारी एवं पशुपालक शामिल रहे।