



जयपुर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पंकज ओझा की फेसबुक पोस्ट चर्चा में है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक ओझा ने अपनी बेटी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि बच्चों के विरोध प्रदर्शन को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यही बच्चे देश का भविष्य हैं।
दिल्ली में कथित परीक्षा एवं पेपर लीक से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी है। विपक्षी दल भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की बात कही है।
पंकज ओझा ने पोस्ट में लिखा, “बच्चों के प्रोटेस्ट को बदनाम मत करो भाइयों, यही हमारे देश का अगला भविष्य हैं। हमारे बच्चे बहुत सीधे हैं। इन बेचारों को तो डिमांड करना भी नहीं आता।”
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी होने से खुश होना चाहते हैं, लेकिन मात्र एक मंत्री के इस्तीफे से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, एक व्यक्ति के स्थान पर दूसरा व्यक्ति आ जाएगा और व्यवस्था में मूलभूत सुधार नहीं हुआ तो परिस्थितियां फिर वैसी ही बनी रहेंगी।
ओझा ने अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए लिखा कि जब वह RAS परीक्षा दे रहे थे, तब भी इसी प्रकार पेपर लीक हुए थे। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की दो वर्षों की मेहनत बेकार हो गई थी और उस समय उन्होंने अन्य अभ्यर्थियों के साथ प्रतिनिधिमंडल के रूप में तत्कालीन अध्यक्ष से मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मांग केवल किसी मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऐसी पारदर्शी और पुख्ता परीक्षा प्रणाली बनाई जानी चाहिए जिसमें किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक न हो सके।
पंकज ओझा ने पोस्ट में पेपर लीक करने वालों और इसमें शामिल लोगों के विरुद्ध अत्यंत कठोर दंड का प्रावधान करने की मांग की। उन्होंने दोषियों को सात दिन के भीतर फांसी दिए जाने की बात भी लिखी।
यह कथन उनकी व्यक्तिगत मांग के रूप में सामने आया है। किसी अपराध में दोषसिद्धि और दंड का निर्धारण लागू कानून तथा न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाता है।
ओझा ने परीक्षा संबंधी घटनाओं से आहत होकर आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की भी मांग की।
ओझा ने लिखा कि ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत व्यर्थ न जाए। उनकी प्रतिभा और बुद्धिमत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन हो तथा योग्य विद्यार्थियों को उचित अवसर मिल सके।
उन्होंने लिखा, “हमें अपने बच्चों को सड़कों पर नहीं, आसमान की उन ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, जहां से वे सारे जगत को अपनी प्रतिभा से रोशन कर सकें।”
फेसबुक पोस्ट के अंत में ओझा ने डिस्क्लेमर देते हुए स्पष्ट किया कि उनकी पोस्ट का संबंध किसी राजनीतिक दल या किसी व्यक्ति के समर्थन अथवा विरोध से नहीं है।
उन्होंने लिखा कि इस पोस्ट का संबंध उनकी छोटी बेटी से है, जो पूरे घटनाक्रम से आहत और चिंतित है। उन्होंने स्वयं को भी एक ऐसे पिता के रूप में उल्लेखित किया, जो अपनी बेटी को अपनी जान से अधिक चाहता है।
एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा विद्यार्थियों के आंदोलन, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से व्यक्त किए गए इन विचारों के बाद उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।