



राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने उठाया छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा; लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक पेश
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को NEET-UG से जुड़े कथित पेपर लीक और अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और तत्काल चर्चा की मांग के कारण लोकसभा एवं राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ समय बाद ही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने NEET विवाद और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों एवं युवाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है और सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए। खड़गे ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर एकत्र युवाओं की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का प्रयोग किया गया।
लोकसभा में भी विपक्षी सदस्यों ने NEET-UG विवाद और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के मामले पर चर्चा कराने की मांग की। लगातार नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार इन दोनों विषयों पर संसद में चर्चा कराने से बच रही है।
विपक्ष ने राम मंदिर से संबंधित मामले की स्वतंत्र जांच और चढ़ावे के खातों को सार्वजनिक किए जाने की मांग भी उठाई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर पारदर्शी जांच कराने की मांग की थी।
हंगामे के बीच केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया। यह विधेयक मई में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा और मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान करता है। विधेयक पारित होने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सर्वोच्च न्यायालय की कुल स्वीकृत क्षमता 38 न्यायाधीश हो जाएगी।
केंद्र सरकार का कहना है कि न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सुप्रीम कोर्ट में अधिक पीठों का गठन हो सकेगा, लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी और न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने मानसून और मानसून सत्र की तुलना करते हुए कहा कि दोनों के सक्रिय और सकारात्मक रहने पर परिणाम अधिक उत्पादक होते हैं। प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और सांसदों से तथ्यों एवं तर्कों के आधार पर सार्थक चर्चा करने और जनहित से जुड़े विधायी कार्यों में सहयोग देने की अपील की।
मानसून सत्र के आगामी दिनों में NEET विवाद, राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, महंगाई, रोजगार और अन्य मुद्दों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष ने इन विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की है, जबकि सरकार ने संसद में विधायी कामकाज सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील की है।