



जयपुर। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की अध्यक्षता में सोमवार को पर्यटन भवन में लोकमंथन-2026 की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, विभिन्न समितियों के गठन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतिभागियों की सहभागिता तथा आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि लोकमंथन-2026 का आयोजन 4 से 6 दिसंबर तक जयपुर में किया जाएगा। इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर से लोक कलाकार, शिल्पकार, विद्वान, शोधकर्ता, विचारक और भारतीय संस्कृति से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे।
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि लोकमंथन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, लोकजीवन, कला, शिल्प और वैचारिक विमर्श का व्यापक राष्ट्रीय मंच है। यह आयोजन देश के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता को एक स्थान पर प्रस्तुत करने के साथ परंपरागत ज्ञान और लोकसंस्कृति के संरक्षण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि लोकमंथन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं, जीवन मूल्यों और अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा। आयोजन के माध्यम से युवाओं को देश की विविध लोक परंपराओं, लोक कलाओं, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली लोक कलाकार और शिल्पकार कार्यरत हैं। लोकमंथन उन्हें अपनी कला और रचनात्मकता प्रस्तुत करने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि आयोजन से स्थानीय एवं पारंपरिक कलाकारों, हस्तशिल्पियों और लोककला से जुड़े लोगों को राष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ आर्थिक अवसर भी प्राप्त होंगे। कार्यक्रम में विचार-विमर्श, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रदर्शनियों और लोककलाओं के माध्यम से भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक पहचान सामने आएगी।
इस वर्ष लोकमंथन-2026 की थीम ‘भारत का संविधान और भारत का लोकजीवन’ निर्धारित की गई है। आयोजन में संविधान और भारतीय समाज के परस्पर संबंध, लोक परंपराओं, सामाजिक मूल्यों तथा भारतीय जीवन पद्धति से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
विद्वान, शोधकर्ता और विचारक विषय आधारित सत्रों में भारतीय संविधान की मूल भावना तथा देश के विविध लोकजीवन में उसकी अभिव्यक्ति पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
दिया कुमारी ने कहा कि राजस्थान अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला, संगीत, नृत्य, शिल्प और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। लोकमंथन-2026 के आयोजन से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में देशभर से आने वाले कलाकारों, विद्वानों और प्रतिभागियों के कारण राजस्थान की पर्यटन छवि भी सुदृढ़ होगी। आयोजन को प्रभावी, सुव्यवस्थित और यादगार बनाने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ समयबद्ध तैयारियां पूरी करें।
बैठक में आयोजन से संबंधित समितियों की जिम्मेदारियां तय करने, अतिथियों और प्रतिभागियों के आवास, परिवहन, सुरक्षा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रदर्शनियों तथा प्रचार-प्रसार की व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया।