



हाईकोर्ट खंडपीठ ने उच्चतम बोलीदाता एएमबी होटल्स के पक्ष में नई डिमांड जारी कर कब्जा सौंपने के निर्देश पर लगाई रोक
जयपुर। जयपुर में एयरपोर्ट के पास स्थित बेशकीमती जमीन के आवंटन से जुड़े दशकों पुराने विवाद में जयपुर विकास प्राधिकरण को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें जेडीए को उच्चतम बोलीदाता फर्म के पक्ष में नई डिमांड जारी कर भुगतान प्राप्त होने के बाद जमीन का भौतिक कब्जा सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह और न्यायाधीश संदीप तनेजा की खंडपीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से दायर विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। खंडपीठ के आदेश के बाद फिलहाल संबंधित जमीन का कब्जा उच्चतम बोलीदाता कंपनी को सौंपने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी।
इससे पहले मई में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जेडीए को निर्देश दिया था कि एयरपोर्ट के पास स्थित संबंधित जमीन के लिए सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी एएमबी होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में नई डिमांड राशि जारी की जाए।
एकलपीठ ने यह भी कहा था कि निर्धारित राशि का भुगतान प्राप्त होने के बाद जमीन का भौतिक कब्जा फर्म को सौंप दिया जाए। जेडीए ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष विशेष अपील प्रस्तुत की।
यह विवाद कई वर्षों से लंबित है। बताया गया कि जब जमीन की नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई थी, उस समय इसका मूल्य करीब 32 करोड़ रुपये आंका गया था। वर्षों के दौरान जयपुर एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्र में भूमि की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।
वर्तमान में इस प्राइम लोकेशन वाली संपत्ति का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 300 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। जमीन के मूल्य में हुई इस बड़ी वृद्धि के कारण मामला जेडीए और संबंधित फर्म—दोनों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन गया है।
खंडपीठ ने फिलहाल एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है। ऐसे में जमीन के आवंटन, नई डिमांड जारी करने और कब्जा सौंपने की आगे की प्रक्रिया विशेष अपील में होने वाली आगामी सुनवाई और अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
अदालत को अब यह तय करना है कि पुराने नीलामी प्रकरण में उच्चतम बोलीदाता कंपनी को वर्तमान परिस्थितियों में जमीन का आवंटन और कब्जा सौंपने का दावा स्वीकार किया जा सकता है अथवा जेडीए की आपत्तियां विधिसम्मत हैं।