Tuesday, 21 July 2026

साइबर ठगी रोकने के लिए ‘जीरो टाइम लैग’ का लक्ष्य, 190 बैंक शाखाओं पर होगी AI आधारित निगरानी:वी. श्रीनिवास


साइबर ठगी रोकने के लिए ‘जीरो टाइम लैग’ का लक्ष्य, 190 बैंक शाखाओं पर होगी AI आधारित निगरानी:वी. श्रीनिवास

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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैंकों को प्रतिक्रिया समय न्यूनतम करने के दिए निर्देश, 1930 हेल्पलाइन की शिकायत पर तत्काल खाते होल्ड कर ठगी की रकम रोकने पर जोर

जयपुर। राजस्थान में साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और ठगी की रकम को तत्काल रोकने के लिए राज्य सरकार, राजस्थान पुलिस और बैंकिंग संस्थानों ने संयुक्त रणनीति तैयार की है। शासन सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की विशेष साइबर समन्वय बैठक में शिकायत प्राप्त होने और संबंधित बैंक खाते पर रोक लगाने के बीच के समय को लगभग शून्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, राजस्थान पुलिस, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तथा प्रमुख बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम, संदिग्ध बैंक खातों की निगरानी, पीड़ितों को राशि वापस दिलाने और बैंक-पुलिस समन्वय को मजबूत करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

शिकायत और खाता होल्ड के बीच समय समाप्त करने पर जोर

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित बैंक की प्रतिक्रिया तत्काल होनी चाहिए। नागरिक की शिकायत दर्ज होने और ठगी की रकम वाले खाते को होल्ड करने की कार्रवाई के बीच का समय-अंतराल पूरी तरह समाप्त करने का प्रयास किया जाए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में दस में से केवल एक मामले में बैंकों की त्वरित प्रतिक्रिया के कारण ठगी की राशि रोकी जा पाना गंभीर चिंता का विषय है। साइबर ठगी में समय सबसे महत्त्वपूर्ण होता है और कुछ मिनटों की देरी से राशि कई खातों में स्थानांतरित होकर निकाल ली जाती है।

मुख्य सचिव ने बैंक अधिकारियों को 1930 कॉल सेंटर का दौरा कर शिकायत निस्तारण की वास्तविक प्रक्रिया समझने तथा पुलिस अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामूहिक और समयबद्ध प्रयासों से राजस्थान को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनाया जा सकता है।

संदिग्ध और म्यूल खातों पर होगी केंद्रीकृत निगरानी

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा साइबर सुरक्षा और म्यूल खातों की रोकथाम के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी ठगी की राशि स्थानांतरित करने के लिए दूसरे व्यक्तियों के नाम पर खोले गए खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे संदिग्ध और म्यूल खातों की केंद्रीकृत डेटाबेस प्रणाली तैयार कर उनकी लगातार निगरानी की जाएगी।

जिला स्तर पर पुलिस और बैंक अधिकारियों की नियमित समन्वय बैठकें आयोजित होंगी। इससे संदिग्ध लेन-देन की पहचान, खातों को समय पर होल्ड करने और साइबर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई में जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि राज्य सरकार साइबर अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। आर4सी के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक जन-जागरूकता के माध्यम से आमजन को साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

बैंक प्रतिनिधि करेंगे 1930 कॉल सेंटर का दौरा

बैठक में दिए गए निर्देशों के तहत बुधवार को सभी प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 कॉल सेंटर का दौरा करेंगे। बैंक अधिकारी कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, खातों पर रोक लगाने की व्यवस्था और पीड़ित नागरिकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझेंगे।

इस दौरे का उद्देश्य पुलिस और बैंकों के बीच प्रत्यक्ष कार्य समन्वय स्थापित करना है, ताकि साइबर ठगी की सूचना मिलते ही संबंधित खाते और लेन-देन पर तेजी से रोक लगाई जा सके।

पुलिस मुख्यालय एवं साइबर रिस्पॉन्स सेंटर में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक सहित प्रमुख बैंकों के नोडल प्रतिनिधियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया गया।

190 हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं पर AI की नजर

प्रदेश की 190 चिह्नित हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं और संदिग्ध एटीएम केंद्रों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी की जाएगी। इन स्थानों पर होने वाले असामान्य लेन-देन, बड़ी नकद निकासी और संदिग्ध खातों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जाएगा।

स्थानीय पुलिस की ओर से इन बैंक शाखाओं और एटीएम केंद्रों का औचक निरीक्षण भी किया जाएगा। इससे साइबर अपराधियों द्वारा बैंकिंग व्यवस्था के दुरुपयोग, फर्जी खातों के संचालन और ठगी की राशि निकालने की गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने में सहायता मिलेगी।

बड़े चालू खातों के लिए भौतिक सत्यापन अनिवार्य करने पर जोर

बैठक में बिना भौतिक सत्यापन के 10 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की सीमा वाले चालू खाते खोलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। संदिग्ध और उच्च जोखिम वाले खातों का व्यवस्थित रूप से दोबारा सत्यापन कराया जाएगा।

बैंकों को खाताधारक की पहचान, व्यवसाय के वास्तविक संचालन, पते और लेन-देन की प्रकृति का समुचित सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। इससे फर्जी कंपनियों और म्यूल खातों के माध्यम से साइबर ठगी की राशि के हस्तांतरण पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी।

KYC के नाम पर ठगी रोकने के लिए सत्यापित माध्यमों का उपयोग

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर ठग अक्सर केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर फर्जी कॉल, एसएमएस और लिंक भेजकर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करते हैं। बैंकों को केवाईसी से संबंधित सूचनाएं केवल सत्यापित और आधिकारिक माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

बैंक संदेशों और कॉल के माध्यम से यह भी स्पष्ट करें कि कोई अधिकारी ग्राहक से ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड नंबर या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं मांगता है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सहायता काउंटर

बैठक में वरिष्ठ नागरिकों की साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। बैंक शाखाओं में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायता काउंटर स्थापित कर उन्हें डिजिटल लेन-देन और साइबर ठगी से बचाव के तरीकों की व्यक्तिगत रूप से जानकारी दी जाएगी।

अधिकारियों ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अक्सर डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट, फर्जी निवेश और बैंक खाते बंद होने जैसे संदेशों के माध्यम से ठगों का निशाना बनते हैं। इसलिए बैंक अधिकारी उन्हें संदिग्ध कॉल, लिंक और वित्तीय लेन-देन के संबंध में विशेष रूप से जागरूक करें।

पीड़ितों को शीघ्र वापस मिलेगी रोकी गई राशि

मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल और ग्रीवांस रिड्रेसल पोर्टल के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया अधिक सरल और तेज बनाई जाएगी। पीड़ित नागरिकों को 50 हजार रुपये तक की राशि तथा न्यायालय के आदेश से रोकी गई रकम शीघ्र लौटाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

बैंकों और पुलिस को ऐसे मामलों में दस्तावेजी प्रक्रिया और आपसी संवाद को सरल बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि पीड़ितों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों और न्यायिक संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।

बड़ी निकासी और एफडी तुड़वाने पर होगा सुरक्षात्मक सत्यापन

भारी नकद निकासी अथवा सावधि जमा को समय से पहले तुड़वाने की स्थिति में बैंक सुरक्षात्मक सत्यापन करेंगे। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और असामान्य लेन-देन के मामलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्राहक किसी साइबर ठग के दबाव अथवा भ्रम में आकर राशि नहीं निकाल रहा है।

खातों को किराए पर देने के खतरों के प्रति भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। लोगों को बताया जाएगा कि अपने बैंक खाते, सिम कार्ड या डिजिटल वॉलेट का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति को करने देना उन्हें आपराधिक जांच के दायरे में ला सकता है।

बैठक में गृह विभाग, वित्त विभाग तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एसएलबीसी संयोजक बैंक और अन्य प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आमजन से किसी भी वित्तीय साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई।

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