



अभिजीत दिपके ने दिया दो घंटे का अल्टीमेटम, जेपी नड्डा से बातचीत के लिए रवाना हुआ प्रतिनिधिमंडल, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ प्रदर्शन को लेकर जंतर-मंतर और उसके आसपास तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और संगठन के समर्थक जंतर-मंतर पर एकत्र हुए तथा संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए संसद की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चेतावनी दी कि यदि दो घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर नहीं लाया गया तो प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च शुरू कर देंगे। वांगचुक इस समय सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और सोमवार को उनकी भूख हड़ताल का 23वां दिन है। वह शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर आंदोलन के समर्थन में अनशन कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर संसद मार्च में शामिल होने के लिए अस्थायी रूप से डिस्चार्ज करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य अब बेहतर है और चिकित्सा संबंधी मानक सामान्य हैं, इसलिए उन्हें मार्च में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए।
वांगचुक ने यह भी कहा कि यदि वह हिरासत में नहीं हैं तो अस्पताल से बाहर जाने और आंदोलन में शामिल होने पर प्रतिबंध का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों का कहना है कि लंबे अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी आवश्यक है।
इस बीच CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और संगठन के प्रतिनिधि आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से बातचीत के लिए रवाना हुए। सौरव दास के अनुसार, सरकार की ओर से संवाद के लिए संपर्क किया गया था, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात का निर्णय लिया। संगठन ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन समाधान उसकी प्रमुख मांगों के आधार पर होना चाहिए।
CJP मुख्य रूप से परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि बार-बार होने वाली परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग पार कर संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। समाचार एजेंसियों और टेलीविजन फुटेज में पुलिसकर्मी कुछ प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाते दिखाई दिए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग और लाठीचार्ज के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि स्थिति को पेशेवर तरीके से नियंत्रित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पार कर पार्लियामेंट स्ट्रीट क्षेत्र तक पहुंच गए, जहां पुलिस ने अनेक लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि संसद के मानसून सत्र के कारण यह क्षेत्र उच्च सुरक्षा वाले जोन में शामिल है और बिना अनुमति किसी जुलूस को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
प्रदर्शन को देखते हुए राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ सहित पांच मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश एवं निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद किए गए। मंडी हाउस क्षेत्र से भी छात्र और युवा जंतर-मंतर की ओर बढ़े, जिन्हें रोकने के दौरान पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं।
जंतर-मंतर से संसद तक जाने वाले मार्ग पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने की जानकारी देते हुए प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित बातचीत के चलते गतिरोध समाप्त होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि अपनी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।