



ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक देगा रिपोर्ट, 15 अगस्त तक पूरी होगी एससी-एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण की लॉटरी
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने सोमवार को हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तावित समय-सारिणी प्रस्तुत कर दी। सरकार की ओर से पेश रोडमैप के अनुसार अगस्त में चुनाव संबंधी प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी और आरक्षण लॉटरी पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग 90 दिन के भीतर चुनाव सम्पन्न कराएगा।
हालांकि, मतदान की अंतिम तारीखों और चरणों की औपचारिक घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना से होगी। सरकार की समय-सारिणी को हाईकोर्ट की स्वीकृति मिलने पर प्रदेश में 15 नवंबर तक अलग-अलग चरणों में पंचायत और निकाय चुनाव सम्पन्न कराए जा सकते हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से 20 जुलाई तक स्पष्ट चुनाव कार्यक्रम प्रस्तुत करने को कहा था। अदालत ने चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करने में हो रहे विलंब पर भी कड़ा रुख अपनाया था।
स्वायत्त शासन विभाग के उपनिदेशक की ओर से हाईकोर्ट में प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि अदालत के 16 जुलाई के आदेश की पालना में शनिवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव, अन्य पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग के सचिव तथा स्वायत्त शासन एवं पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में ओबीसी सर्वे, आरक्षण निर्धारण, लॉटरी प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम को लेकर विभागवार समयसीमा निर्धारित की गई।
राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन चुनाव कार्यक्रम जारी करने से पहले राज्य सरकार द्वारा श्रेणीवार आरक्षण और आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाना आवश्यक है।
निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग पांच अगस्त तक अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग आरक्षित सीटों की लॉटरी प्रक्रिया प्रारंभ करेंगे। दोनों विभागों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण 15 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार आरक्षण लॉटरी निकाले जाने की तारीख से राज्य निर्वाचन आयोग को 90 दिन के भीतर पंचायत और निकाय चुनाव सम्पन्न कराने होंगे। यदि आरक्षण प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूरी हो जाती है तो चुनाव की अधिकतम समयसीमा 15 नवंबर के आसपास बनेगी।
आरक्षण और वार्डवार सीटों का विवरण मिलने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम, नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी, चुनाव चिह्न आवंटन, मतदान और मतगणना की तारीखें घोषित करेगा।
प्रस्तावित कार्यक्रम को अदालत की मंजूरी मिलने और आरक्षण प्रक्रिया समय पर पूरी होने की स्थिति में प्रथम चरण का मतदान अगस्त के अंतिम सप्ताह अथवा सितंबर के प्रारंभ में कराया जा सकता है। चुनाव नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के लिए अलग-अलग चरणों में होने की संभावना है।
राज्य निर्वाचन आयोग चुनावों की तैयारियों में पहले से जुटा हुआ है। मतदान के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और चरणबद्ध चुनाव कराने की प्रशासनिक तैयारियां भी की जा रही हैं।
सरकार द्वारा प्रस्तुत रोडमैप प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम है। इसे अंतिम चुनाव घोषणा नहीं माना जाएगा। हाईकोर्ट की ओर से समय-सारिणी पर आदेश पारित किए जाने तथा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही मतदान और मतगणना की निश्चित तारीखें स्पष्ट होंगी।
ऐसे में प्रदेश के मतदाताओं, संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की निगाहें हाईकोर्ट के आदेश तथा राज्य निर्वाचन आयोग की आगामी घोषणा पर टिकी हुई हैं।