



ओबीसी आयोग को 5 अगस्त तक रिपोर्ट देने का लक्ष्य; आरक्षण लॉटरी पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग जारी करेगा चुनाव कार्यक्रम
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने की तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रस्तावित रोडमैप के अनुसार सितंबर के प्रथम सप्ताह से नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जबकि पंचायत चुनाव अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से कराए जाने की संभावना है। संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि अंतिम तिथियां राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी।
राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से चुनावों में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त किए जाने और निश्चित समय-सारिणी बताने के निर्देश के बाद रविवार को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में ओबीसी सर्वे, आरक्षण निर्धारण और संभावित चुनाव कार्यक्रम को लेकर अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर मंथन किया गया। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कार्यक्रम की समयसीमा स्पष्ट करने के लिए कहा है।
प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग को पांच अगस्त तक अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने का लक्ष्य दिया गया है। आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग आरक्षित सीटों के निर्धारण तथा लॉटरी की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
इस प्रक्रिया को दस दिन में पूरा करते हुए 15 अगस्त तक आरक्षण लॉटरी और सीटों का वर्गवार निर्धारण करने की तैयारी है। इसके बाद 16 या 17 अगस्त तक संबंधित विवरण राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जा सकता है। चुनाव कार्यक्रम आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही घोषित किया जा सकेगा, क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि वर्गवार आरक्षण निर्धारित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
कार्ययोजना के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग को आरक्षण संबंधी रिपोर्ट मिलने के दो से तीन दिन के भीतर चुनाव कार्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। आयोग सबसे पहले नगरीय निकाय चुनावों का कार्यक्रम जारी कर सकता है। चुनाव की अधिसूचना जारी होने से परिणाम घोषित होने तक करीब 40 दिन का समय लगने का अनुमान है।
इसके आधार पर सितंबर के प्रथम सप्ताह से निकाय चुनावों की मतदान प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका चुनावों के बाद पंचायती राज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया शुरू किए जाने का प्रस्ताव है। कुछ रिपोर्टों में निकाय चुनाव सितंबर-अक्टूबर तथा पंचायत चुनाव अक्टूबर-नवंबर के बीच कराने के संकेत भी दिए गए हैं।
नगरीय निकाय चुनावों के बाद अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। राज्य सरकार की प्रस्तावित समय-सारिणी के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग को 15 नवंबर तक निकाय और पंचायत चुनावों की संपूर्ण प्रक्रिया सम्पन्न करनी होगी।
सरकार की ओर से हाईकोर्ट के समक्ष 15 अगस्त से 15 नवंबर के बीच चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का रोडमैप प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। अदालत सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और ओबीसी आयोग की ओर से प्रस्तुत समयसीमा पर विचार करने के बाद आगे के निर्देश जारी कर सकती है।
प्रदेश में स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी वर्ग का राजनीतिक प्रतिनिधित्व निर्धारित करने के लिए घर-घर सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे का कार्य 10 जुलाई से शुरू हुआ था और इसे 23 जुलाई तक पूरा करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी आरक्षण और संबंधित सीटों का निर्धारण किया जाएगा।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आयोग ने बड़ी संख्या में परिवारों और मतदाताओं से संबंधित आंकड़े एकत्र कर लिए हैं। सर्वे पूरा होने के बाद पहली बार स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित विस्तृत सरकारी आंकड़े सामने आने की संभावना है।
अब तक राजस्थान में ओबीसी आबादी को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए जाते रहे हैं। नए सर्वे के आंकड़े आरक्षण निर्धारण के साथ भविष्य की सामाजिक और राजनीतिक नीतियों के लिए भी महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
प्रस्तावित समय-सारिणी सरकार के स्तर पर तैयार किया गया रोडमैप है। ओबीसी आयोग की अंतिम रिपोर्ट, आरक्षण लॉटरी, हाईकोर्ट के आगामी निर्देश और राज्य निर्वाचन आयोग के निर्णय के बाद ही चुनाव की निश्चित तारीखें घोषित होंगी।
ऐसे में सितंबर और अक्टूबर की समयसीमा को संभावित चुनाव कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी किए जाने से पहले मतदान की तिथियों को अंतिम नहीं माना जाएगा।