



जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रशासनिक अनियमितताओं, ड्यूटी में लापरवाही और गंभीर शिकायतों से जुड़े विभिन्न मामलों में सख्त कार्रवाई को मंजूरी दी है। जयपुर स्थित महिला बंदी सुधार गृह की डिप्टी सुपरिटेंडेंट सरोज विश्नोई को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही दो राजस्थान पुलिस सेवा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और रिश्वत के आरोपी एक डीएसपी के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर बैठक के अगले दिन मंगलवार को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई के प्रस्तावों को मंजूरी दी। एक मेडिकल ऑफिसर को सेवा से बर्खास्त करने के साथ ही कुछ अन्य अधिकारियों के वेतनवृद्धि और पेंशन रोकने के निर्णय भी लिए गए हैं।
जयपुर के महिला बंदी सुधार गृह में डिप्टी सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत सरोज विश्नोई को निलंबित कर उनका मुख्यालय भरतपुर निर्धारित किया गया है।
बताया गया है कि सरोज विश्नोई के खिलाफ एक महिला बंदी को अपने साथ रखने और उसे कार्यालय के कामकाज में कर्मचारियों की तरह हस्तक्षेप करने की अनुमति देने की शिकायतें मिली थीं। इसके अतिरिक्त, उन पर कथित रूप से पैसे लेकर बंदियों को नियमों के विरुद्ध सुविधाएं उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए थे।
इन शिकायतों और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित करने का निर्णय लिया है। मामले में नियमानुसार आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट में साइबर क्राइम के सहायक पुलिस आयुक्त देरावर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी है। उन्हें राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत नियम 16 की चार्जशीट जारी किए जाने की स्वीकृति दी गई है।
आरोप है कि देरावर सिंह ने डीग जिले के कामां थाने में इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए हत्या के एक मामले की जांच में आठ आरोपियों में से केवल एक को दोषी माना और शेष सात आरोपियों को बचाने का प्रयास किया।
इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद उनकी भूमिका की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में भूमिका सामने आने पर विभागीय कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने आरपीएस अधिकारी लाभुराम विश्नोई के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित मानते हुए विभागीय जांच रिपोर्ट को मंजूरी दी है।
लाभुराम विश्नोई पर सवाईमाधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र में बनास नदी में अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पर्याप्त एवं प्रभावी कदम नहीं उठाने का आरोप था।
जांच में यह भी सामने आया कि कार्रवाई के दौरान संबंधित विभागों के साथ आवश्यक समन्वय नहीं किया गया। इसके कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बनी और पुलिस जाब्ते की सुरक्षा भी जोखिम में पड़ी। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर अब उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बेशकीमती सरकारी भूमि को नीलामी के माध्यम से आवंटित करने के बजाय कथित रूप से मनमाने तरीके से आवंटित किए जाने के मामले में एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी दी है।
अधिकारी के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा अनुशासन एवं अपील नियमों के नियम 8 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से संबंधित आईएएस अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामले में मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत एक डॉक्टर को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने की मंजूरी दी है।
इसके अतिरिक्त, दो अलग-अलग मामलों में अधिकारियों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया है। एक सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी की 20 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोकने की भी मंजूरी दी गई है।
राज्य सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमों के नियम 34 के तहत दायर पांच पुनर्विचार प्रकरणों में अधिकारियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इन मामलों में पूर्व में की गई विभागीय कार्रवाई को बरकरार रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने रिश्वत लेने के आरोपी एक पुलिस उपाधीक्षक के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान की है। मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसी संबंधित न्यायालय में नियमानुसार आरोप-पत्र और अभियोजन की आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेगी।
वहीं, भीलवाड़ा के तत्कालीन सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी राकेश खोईवाल के खिलाफ भी सीसीए नियम 16 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी गई है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी सेवा में भ्रष्टाचार, लापरवाही और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।