



जयपुर। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विधानसभा की कम बैठकों और सदन में जनहित के मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार के कार्यकाल में विधानसभा को केवल औपचारिकता बनाकर रख दिया गया है और मंत्री जनता से जुड़े सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं।
डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर विधानसभा के कामकाज से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए कहा कि राजस्थान के 75 साल के इतिहास में जनता की आवाज को जितना वर्तमान सरकार के कार्यकाल में दबाया जा रहा है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने इसे जन मुद्दों, जवाबदेही और लोकतांत्रिक परंपराओं का दमन बताया।
डोटासरा ने लिखा कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान 16वीं राजस्थान विधानसभा में अब तक केवल 5 सत्र आयोजित किए गए हैं। इन सत्रों में कुल 84 बैठकें हुईं और विधानसभा ने करीब 573 घंटे काम किया।
उन्होंने दावा किया कि यह राजस्थान विधानसभा के इतिहास के सबसे कमजोर प्रदर्शनों में शामिल है। डोटासरा ने कहा कि विधानसभा की बैठकों की संख्या कम होने से विधायकों को अपने क्षेत्रों और प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
डोटासरा ने लिखा— “राजस्थान के 75 साल के इतिहास में आज जनता की आवाज सबसे ज्यादा दबाई जा रही है। आंकड़े गवाह हैं। जन मुद्दों, जवाबदेही और लोकतांत्रिक परंपराओं का जितना दमन भाजपा की भजनलाल सरकार में हुआ है, पहले कभी नहीं हुआ।”
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार विधानसभा में विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले जनहित के मुद्दों पर चर्चा कराने और उनका जवाब देने से बचती है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा जनता के सवालों को सरकार के सामने रखने और सरकार की जवाबदेही तय करने का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मंच है, लेकिन वर्तमान सरकार में इस मंच का दायरा लगातार संकुचित होता जा रहा है।
उन्होंने कहा— “सदन में अक्सर भाजपा सरकार जन मुद्दों पर जवाब और चर्चा से बचती दिखाई देती है। इस सरकार ने जनता के मंच को केवल औपचारिकता बनाकर रख दिया है। लोकतंत्र को कमजोर करने की यह प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है।”
राजस्थान विधानसभा की बैठकों और कार्य दिवसों में आई कमी को लेकर पहले भी राजनीतिक दलों और वरिष्ठ विधायकों की ओर से चिंता जताई जाती रही है। विधानसभा के कम कार्य दिवस होने से प्रश्नकाल, शून्यकाल, विधेयकों पर चर्चा और जनहित से जुड़े विषयों के लिए उपलब्ध समय प्रभावित होता है।
हालांकि, डोटासरा के आरोपों और उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर राज्य सरकार या भाजपा की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार की प्रतिक्रिया आने पर उसका पक्ष भी खबर में शामिल किया जाएगा।