Tuesday, 14 July 2026

कैंसर सर्जरी में नई क्रांति: 3D प्रिंटिंग, AI और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी से मरीजों को मिल रहा नया जीवन


कैंसर सर्जरी में नई क्रांति: 3D प्रिंटिंग, AI और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी से मरीजों को मिल रहा नया जीवन

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस विशेष: एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी से कैंसर मरीजों की कार्यक्षमता, सौंदर्य और आत्मविश्वास हो रहा बहाल
जयपुर। कैंसर का सफल उपचार अब केवल ट्यूमर को निकाल देने तक सीमित नहीं रह गया है। उपचार के बाद मरीज को फिर से सामान्य जीवन जीने योग्य बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। कैंसर सर्जरी के बाद शरीर के प्रभावित अंगों की कार्यक्षमता, सौंदर्य और आत्मविश्वास को पुनः स्थापित करने में एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्टिव एवं माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी अहम भूमिका निभा रही है।

भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों के लिए अत्याधुनिक रिकंस्ट्रक्टिव माइक्रोसर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI, और 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की सहायता से मरीजों की व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार उपचार योजना तैयार कर रही है।

आज विश्वभर में कैंसर सर्जरी को अधिक सटीक, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित बनाने के लिए AI और 3D प्रिंटिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। AI की सहायता से CT स्कैन और MRI जैसी जांचों का बेहतर विश्लेषण कर सर्जरी की विस्तृत योजना बनाई जा सकती है। वहीं, 3D प्रिंटिंग तकनीक मरीज के प्रभावित भाग का त्रि-आयामी मॉडल तैयार कर जटिल ऑपरेशन की पूर्व योजना बनाने में मदद करती है।

विशेष रूप से सिर एवं गर्दन, जबड़े और बोन ट्यूमर की जटिल सर्जरी में इन तकनीकों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। इससे ऑपरेशन से पहले प्रभावित हिस्से की संरचना को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है और सर्जरी को अधिक सटीक तरीके से अंजाम दिया जा सकता है।

बीएमसीएच के सेंटर फॉर एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्शन के एचओडी डॉ. सौरभ रावत ने बताया कि कैंसर सर्जरी के बाद कई मरीजों को बोलने, खाना खाने, सांस लेने या सामान्य शारीरिक गतिविधियां करने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मामलों में माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के माध्यम से शरीर के दूसरे हिस्से से त्वचा, मांसपेशी, हड्डी या अन्य ऊतकों को उनकी रक्त वाहिनियों सहित प्रभावित स्थान पर प्रत्यारोपित किया जाता है।

उन्होंने बताया कि ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप की सहायता से अत्यंत महीन रक्त वाहिनियों और नसों को जोड़ा जाता है, जिससे प्रभावित अंगों की कार्यक्षमता को फिर से स्थापित करने में मदद मिलती है। यह तकनीक ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, हेड एंड नेक कैंसर, बोन और सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर के मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है।

डॉ. रावत ने कहा कि कैंसर उपचार का उद्देश्य केवल मरीज की जान बचाना नहीं, बल्कि उसे बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करना भी है। आधुनिक रिकंस्ट्रक्टिव माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की सहायता से कैंसर मुक्त हो चुके मरीजों को दोबारा सामान्य रूप से बोलने, मुंह खोलने, भोजन करने, पहले की तरह दिखने और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि AI आधारित सर्जिकल प्लानिंग और 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकें इस क्षेत्र को और अधिक सटीक एवं मरीज-केंद्रित बना रही हैं।

बीएमसीएच के सेंटर फॉर एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्शन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुराग शर्मा ने बताया कि AI और 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के सहयोग से ऑपरेशन में लगने वाला समय कम होता है और मरीजों की रिकवरी भी तेजी से होती है।

उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में हेड एंड नेक कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, बोन एवं सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर रोगियों के लिए एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्टिव सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अस्पताल में प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विशेषज्ञ, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य विशेषज्ञ मिलकर प्रत्येक मरीज के लिए समग्र उपचार योजना तैयार करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर सर्जरी के बाद रिकंस्ट्रक्टिव और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी मरीजों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी सामान्य जीवन में लौटने में मदद करती है। विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस के अवसर पर यह संदेश महत्वपूर्ण है कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ उपचार कैंसर मरीजों को नई उम्मीद और नया जीवन दे रहे हैं।

    Previous
    Next

    Related Posts