



मोंटपेलियर। राजस्थान में युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से पिछले 22 वर्षों से चलाया जा रहा अनूठा अभियान “दारू नहीं दूध के साथ करो नए वर्ष की शुरुआत” अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है। फ्रांस के मोंटपेलियर शहर में आयोजित 7वें यूरोपियन सोशल मार्केटिंग कॉन्फ्रेंस, ESMC 2026, में इस भारतीय अभियान को वैश्विक मंच पर केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया गया।
यह कॉन्फ्रेंस 8 से 10 जुलाई 2026 तक मोंटपेलियर यूनिवर्सिटी के एमबीएस बिजनेस स्कूल में आयोजित हुई। इसमें अमेरिका, यूके, जर्मनी, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत सहित 25 देशों के 300 से अधिक सोशल मार्केटिंग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और बिहेवियरल साइंटिस्ट शामिल हुए। सम्मेलन में कुल 104 शोध पत्र और केस स्टडीज प्रस्तुत की गईं।
भारत की ओर से गांधी फाउंडेशन के अध्यक्ष और WHO सिविल सोसाइटी के सदस्य डॉ. रमेश गांधी ने ऑनलाइन प्रस्तुति देकर राजस्थान के इस मॉडल को दुनिया के विशेषज्ञों के सामने रखा। इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर “न्यू मिल्की वे: एल्कोहॉल फ्री न्यू ईयर सेलिब्रेशन मॉडल” के रूप में सराहना मिली। बताया गया कि भारत से चयनित यह एकमात्र केस स्टडी थी, जिसे डॉ. गांधी ने दो वर्षों की रिसर्च के बाद तैयार किया।
कॉन्फ्रेंस में ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा और जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी, यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड और यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ, जापान की दोशीशा यूनिवर्सिटी तथा पोलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ इकनॉमिक्स एंड बिजनेस सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। इस सम्मेलन के चेयरपर्सन लंदन के प्रोफेसर जैफ फ्रेंच और रिसर्च हेड फ्रांस के एमबीएस स्कूल ऑफ बिजनेस की डॉ. जैकलिन बॉयसेले रहीं।
राजस्थान विश्वविद्यालय से शुरू हुआ अभियान
“दारू नहीं दूध” अभियान की शुरुआत वर्ष 2003-04 में राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से हुई थी। नए वर्ष की पूर्व संध्या पर युवाओं को शराब और हुड़दंग से दूर रखने के लिए राजस्थान युवा छात्र संस्था और इंडियन अस्थमा केयर सोसाइटी के सदस्यों ने समाजसेवियों के साथ मिलकर केसर-बादाम युक्त गर्म दूध का सकारात्मक विकल्प दिया।
शुरुआती वर्ष में यह अभियान करीब 500 लीटर दूध से शुरू हुआ था। समय के साथ सरस डेयरी, लोटस डेयरी, राजस्थान विश्वविद्यालय, व्यापारिक संगठनों, जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और समाजसेवियों के सहयोग से यह अभियान लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2026 की शुरुआत तक प्रति आयोजन दूध की मात्रा 7,500 लीटर तक पहुंच गई।
250 से अधिक स्थानों तक पहुंचा संदेश
जयपुर से शुरू हुआ यह अभियान कोरोना काल को छोड़कर निरंतर जारी रहा है। अब राजस्थान के कई गांवों, कस्बों, मंदिरों, गुरुद्वारों, गली-चौराहों और बाजारों में 250 से अधिक स्थानों पर इस अभियान का आयोजन किया जा चुका है। इसके माध्यम से हजारों लीटर दूध वितरित कर लाखों युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
डॉ. गांधी ने बताया व्यवहार परिवर्तन का मॉडल
डॉ. रमेश गांधी ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि युवाओं को केवल कानून या पाबंदी से रोकने के परिणाम सीमित होते हैं। यदि उत्सव के माहौल में उन्हें शराब के स्थान पर स्वादिष्ट, गर्म और आकर्षक विकल्प दिया जाए, तो वे स्वयं नशे को नकारते हैं। उन्होंने कहा कि यही इस अभियान का व्यवहार परिवर्तन और सोशल मार्केटिंग मॉडल है, जिसे दुनिया के विशेषज्ञ सराह रहे हैं।
शराब से जुड़े वैश्विक आंकड़ों ने बढ़ाई केस स्टडी की अहमियत
प्रस्तुति में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, शराब के हानिकारक उपयोग के कारण दुनिया भर में प्रतिवर्ष करीब 30 लाख लोगों की मृत्यु होती है। लगभग 40 करोड़ लोग अल्कोहल यूज़ डिसऑर्डर, AUD, से प्रभावित बताए गए हैं। भारत में भी शराब सेवन से जुड़े गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभावों को देखते हुए ऐसे सकारात्मक अभियानों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
डॉ. गांधी ने कहा कि राजस्थान का “दारू नहीं दूध” मॉडल किसी प्रतिबंधात्मक सोच पर आधारित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को बेहतर विकल्प देने वाला व्यावहारिक और सामाजिक मॉडल है। इसी कारण यह अभियान अब वैश्विक स्तर पर नशामुक्ति और व्यवहार परिवर्तन के एक प्रभावी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।