Monday, 13 July 2026

भारत-पाक सीमा क्षेत्र में निर्माणों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च


भारत-पाक सीमा क्षेत्र में निर्माणों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च

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हाईकोर्ट: 0 से 50 किमी सीमा क्षेत्र की हर संपत्ति की अलग-अलग होगी जांच, कलेक्टर-एसपी और BSF प्रतिनिधि की कमेटी रिपोर्ट देगी
जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 0 से 50 किलोमीटर क्षेत्र में स्थित धार्मिक स्थलों और अन्य निर्माणों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च है। हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए निर्देश दिए कि सीमा क्षेत्र में स्थित प्रत्येक संपत्ति की अलग-अलग जांच की जाएगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील पहलुओं को देखते हुए मामले की सुनवाई सोमवार को बंद कमरे में हुई। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने कहा कि सीमा क्षेत्र में स्थित प्रत्येक संपत्ति की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, इसलिए सभी मामलों का एक जैसा निर्णय नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने प्रत्येक संपत्ति की जांच के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में संबंधित जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और सीमा सुरक्षा बल, BSF, के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। समिति राष्ट्रीय सुरक्षा, भूमि के स्वामित्व, निर्माण की वैधता, अनुमतियों और अन्य सहायक तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सक्षम प्राधिकारी करेगा अंतिम निर्णय
कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में भूमि के स्वामित्व, कब्जे, निर्माण की वैधता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न शामिल हैं, उनकी जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी माना कि संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सीधे रिट याचिका दायर करने के बजाय वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत लागू रहते हैं, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार उनमें आवश्यक लचीलापन रखा जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुरूप अंतिम निर्णय लेगा। सीमा क्षेत्र में सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा सर्वोपरि है, इसलिए ऐसे मामलों में संतुलित और तथ्य आधारित निर्णय आवश्यक है।

क्या है पूरा मामला
मामला भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में कथित अवैध निर्माणों से जुड़ा है। बताया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती इलाकों का सर्वे किया था। सर्वे में यह सामने आया कि 0 से 50 किलोमीटर के संवेदनशील सुरक्षा दायरे में पिछले कुछ वर्षों में कई धार्मिक स्थल, मदरसे, मस्जिदें, दरगाह और अन्य निर्माण बिना आवश्यक अनुमति के खड़े किए गए।

प्रशासन के अनुसार इनमें से कई निर्माण गोचर, ओरण और सरकारी भूमि पर किए गए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे निर्माणों को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील माना। इसके बाद प्रशासन की ओर से संबंधित निर्माणों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए, जिन्हें स्थानीय समितियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अब हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए याचिकाएं खारिज कर दी हैं और प्रत्येक संपत्ति की अलग-अलग जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत हुई कार्रवाई
सीमावर्ती क्षेत्रों में कथित अवैध अतिक्रमण और बिना अनुमति बने निर्माणों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन की ओर से संयुक्त कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसे ‘ऑपरेशन क्लीन’ या ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ के रूप में जाना गया। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास 50 किलोमीटर के दायरे में अवैध, संदिग्ध और बिना अनुमति वाले निर्माणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करना बताया गया।

जून 2026 में प्रशासन ने पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में कई स्थानों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। बाड़मेर जिले के सीमावर्ती इलाकों गडरारोड, मुनाबाओ, रामसर, बीजराड़, सेड़वा और बाखासर में कार्रवाई की गई। बताया गया कि सेड़वा और गडरा रोड क्षेत्र में कई अवैध धार्मिक ढांचों और मदरसों को हटाया गया। बाखासर के देम्बा में अवैध दुकानों और मलाणा गांव में सीमा क्षेत्र के पास बने कथित अवैध धार्मिक निर्माण को हटाने की कार्रवाई की गई।

जैसलमेर जिले में भी सरकारी भूमि पर बने कथित अवैध निर्माणों को हटाया गया। नोख थाना क्षेत्र के मालासर गांव के पास बने अवैध मदरसे और मस्जिद को हटाने की कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। प्रशासन ने दोनों जिलों में 300 से अधिक कथित अवैध कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए थे।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सीमा क्षेत्र में स्थित प्रत्येक संपत्ति की जांच अलग-अलग आधार पर होगी। जांच रिपोर्ट में भूमि का स्वामित्व, निर्माण की अनुमति, कब्जे की स्थिति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखा जाएगा। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।

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