



पंचायत और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निरीक्षण में सफाई व्यवस्था पर नाराजगी के बाद कार्रवाई, कर्मचारियों में सुगबुगाहट और बाड़मेर में विरोध के स्वर
जयपुर। अलवर जिले के 8 ग्राम विकास अधिकारियों, VDO, का सामूहिक तबादला अब चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। पंचायती राज एवं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के अलवर दौरे के तुरंत बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इन अधिकारियों को अलवर से बाड़मेर स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए हैं।
बताया जा रहा है कि मंत्री मदन दिलावर ने अलवर दौरे के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था, जलभराव और नालियों के चोक होने की स्थिति पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद स्वच्छता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के नाम पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
निरीक्षण के बाद हुई कार्रवाई
मामले की शुरुआत मंत्री मदन दिलावर के अलवर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के औचक निरीक्षण से हुई। निरीक्षण के दौरान कई ग्राम पंचायतों में कचरे के ढेर, सफाई व्यवस्था में कमी, नालियों के अवरुद्ध होने और सड़कों पर गंदा पानी जमा होने जैसी स्थितियां सामने आईं।
ग्रामीणों ने भी मंत्री के सामने स्थानीय प्रशासन और ग्राम विकास अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर शिकायतें रखीं। इसके बाद मंत्री ने मौके पर मौजूद उच्च अधिकारियों को लापरवाह कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
8 VDO को बाड़मेर भेजा
ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार अलवर जिले की उमरैण, मालाखेड़ा, रेणी और लक्ष्मणगढ़ पंचायत समितियों में कार्यरत कुल 8 ग्राम विकास अधिकारियों का तबादला बाड़मेर जिले में किया गया है।
आदेश के तहत VDO अभिषेक तिवाड़ी, कपिल कुमार मीणा, मुकेश कुमार मीणा और मनीष मीणा को पंचायत समिति चौहटन, बाड़मेर में रिक्त पदों पर लगाया गया है। वहीं VDO जगदीश प्रसाद, सचिन गोयल, सोनू खंडेलवाल और बाबूलाल यादव का स्थानांतरण पंचायत समिति धोरीमन्ना, बाड़मेर की ग्राम पंचायतों में किया गया है।
अलवर से बाड़मेर की दूरी करीब 600 से 650 किलोमीटर मानी जाती है। ऐसे में एक साथ 8 अधिकारियों को इतनी दूर भेजे जाने को प्रशासनिक गलियारों में कड़ी कार्रवाई और चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों में नाराजगी
इस कार्रवाई के बाद पंचायती राज कर्मचारियों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ से जुड़े कुछ पदाधिकारियों का अनौपचारिक रूप से कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था केवल VDO के स्तर पर निर्भर नहीं होती। इसके लिए बजट, संसाधन, सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था भी जिम्मेदार होती है।
कर्मचारी वर्ग में यह सवाल भी उठ रहा है कि बिना औपचारिक विभागीय जांच या स्पष्टीकरण का मौका दिए केवल निरीक्षण के आधार पर इतने दूर तबादला करना कितना उचित है। कुछ कर्मचारियों ने इसे ‘पनिशमेंट ट्रांसफर’ बताते हुए नाराजगी जताई है।
बाड़मेर को लेकर भी उठे सवाल
तबादला आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बाड़मेर के स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि बाड़मेर को दंडात्मक पोस्टिंग के रूप में देखना उचित नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाड़मेर आज रिफाइनरी, कच्चे तेल, ऊर्जा परियोजनाओं, सौर ऊर्जा और औद्योगिक विकास के कारण राजस्थान के महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों में शामिल हो रहा है। ऐसे में किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को इस तरह प्रस्तुत करना कि बाड़मेर ‘सजा’ का स्थान है, जिले की छवि और स्थानीय जनता की भावना के विपरीत है।
जवाबदेही बनाम प्रक्रिया पर बहस
पूरे मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही और स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक पक्ष का मानना है कि सार्वजनिक सुविधाओं, सफाई व्यवस्था और आमजन की समस्याओं में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। वहीं दूसरा पक्ष कह रहा है कि कार्रवाई नियमों और प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए तथा संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
फिलहाल अलवर से बाड़मेर किए गए इन तबादलों ने प्रदेश के पंचायती राज विभाग में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि कर्मचारी संगठन इस आदेश को लेकर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हैं या सरकार इसे प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा बताते हुए अपने रुख पर कायम रहती है।