



जयपुर। राजस्थान के जाने-माने संगीतकार और वीणा म्यूजिक समूह के संस्थापक के.सी. मालू का सोमवार देर रात दिल्ली में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही प्रदेश के संगीत प्रेमियों, कलाकारों और राजस्थानी लोक संस्कृति से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार अपराह्न 4:30 बजे जयपुर के निर्माण नगर स्थित पार्श्वनाथ कॉलोनी स्थित निवास से रवाना होकर पुरानी चुंगी, अजमेर रोड मोक्षधाम पहुंचेगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राजस्थानी लोक संगीत और संस्कृति को देश-दुनिया में पहचान दिलाने के लिए के.सी. मालू को ‘राजस्थान रत्न’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता के पांच हजार से अधिक लोकगीतों की पांडुलिपि और ध्वनिलिपि तैयार कर उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग करवाई। लोकगीतों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।
वर्ष 1946 में चूरू जिले के सुजानगढ़ में जन्मे केशरी चंद मालू ने अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया था। इसके साथ ही उन्होंने साहित्य रत्न और जैन सिद्धांत रत्न का भी अध्ययन किया। केसी मालू को राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से ‘समग्र कला साधना अवॉर्ड’ और महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन की ओर से ‘डागर घराना अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया गया था।
वर्ष 1987 में अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए केसी मालू ने जयपुर में लता मंगेशकर नाइट का आयोजन करवाया था, जिसके माध्यम से करीब एक करोड़ रुपए की राशि एकत्र की गई थी। उन्होंने ‘घूमर’, ‘चीरमी’ और ‘कांगसियो’ जैसे कई लोकप्रिय राजस्थानी गीतों के एलबम भी प्रोड्यूस किए।
केसी मालू को स्वदेशी संगीत को समर्पित संस्था सुर-संगम और राजस्थान लोक संगीत की प्रतिष्ठित वीणा म्यूजिक समूह की स्थापना का श्रेय भी दिया जाता है। उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद के साथ मिलकर देश के कई नामी कलाकारों के माध्यम से राजस्थानी लोक संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया।
मालू ने राजस्थानी विवाह गीतों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके रचित 221 राजस्थानी विवाह गीतों के दो ग्रंथ प्रकाशित हुए, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी और राजस्थानी भाषाओं का सचित्र उपयोग किया गया। इसके साथ ही इन विवाह गीतों की 24 ऑडियो-वीडियो सीडी भी जारी की गईं। इसे विवाह गीतों के बड़े और महत्वपूर्ण संकलनों में माना जाता है।
केसी मालू के निधन से राजस्थानी लोक संगीत, संस्कृति और कला जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उन्होंने अपने जीवन को लोकधुनों, लोकभाषा और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित किया।