Saturday, 11 July 2026

जयपुर मेट्रो विस्तार की कवायद तेज, तीसरे चरण और नए कॉरिडोर की फिजिबिलिटी जांच शुरू


जयपुर मेट्रो विस्तार की कवायद तेज, तीसरे चरण और नए कॉरिडोर की फिजिबिलिटी जांच शुरू

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जयपुर मेट्रो:  वैशाली नगर, जगतपुरा, मालवीय नगर और रामगढ़ मोड़ को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने पर मंथन; बाहरी क्षेत्रों के लिए मेट्रो लाइट मॉडल पर विचार
जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 4 जून को जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण का शिलान्यास किए जाने के बाद राजधानी में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की कवायद तेज हो गई है। राज्य सरकार ने जयपुर मेट्रो के तीसरे चरण और भविष्य के नए कॉरिडोर की योजना पर काम शुरू कर दिया है। संभावित रूटों की फिजिबिलिटी जांचने के लिए मेट्रो प्रशासन ने एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी है, जो विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर जयपुर मेट्रो के नए रूट तय किए जाएंगे।

शुरुआती योजना में वैशाली नगर, जगतपुरा, मालवीय नगर और रामगढ़ मोड़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा जयपुर शहर के बाहरी और उपनगरीय क्षेत्रों को जोड़ने के लिए मेट्रो लाइट मॉडल पर भी मंथन किया जा रहा है।

प्रस्तावित योजना के तहत चाकसू, बस्सी, चौमूं, बगरू, फागी और चंदवाजी तक कम यात्री क्षमता वाले फीडर कॉरिडोर विकसित करने की संभावना तलाशी जा रही है। इसमें बस्सी को ट्रांसपोर्ट नगर, चाकसू को सीतापुरा, चौमूं को डोटी, फागी को सांगानेर और बगरू को 200 फीट चौराहे से जोड़ने जैसे प्रस्तावों पर प्रारंभिक स्तर पर विचार किया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट में जयपुर मेट्रो का संचालन बस्सी तक बढ़ाने की घोषणा की थी और इसके लिए डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी। अब वर्तमान सरकार जयपुर शहर की सीमा से लगे उपनगरीय क्षेत्रों तक मेट्रो लाइट मॉडल के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाओं पर काम कर रही है।

फेज-2 के लिए प्रहलादपुरा में टेस्ट पाइलिंग शुरू
जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना के तहत निर्माण कार्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया गया है। प्रहलादपुरा में रिंग रोड के पास टेस्ट पाइलिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह प्रक्रिया मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर की नींव की मजबूती और जमीन की भार वहन क्षमता की जांच के लिए की जा रही है।

शुक्रवार को टेस्ट पाइलिंग के दौरान मेट्रो के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। निर्धारित स्थानों पर पाइल डालकर उन पर लोड टेस्ट किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित भूमि मेट्रो पिलरों का भार सुरक्षित रूप से वहन कर सकती है या नहीं।

टेस्ट पाइलिंग के परिणामों के आधार पर पाइल की गहराई, व्यास और डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद संबंधित स्थानों पर स्थायी पाइलिंग और पिलर निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य सिविल कार्यों में भी तेजी आने की संभावना है।

जयपुर मेट्रो के विस्तार को शहर की बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव और उपनगरीय क्षेत्रों के तेज विकास को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रस्तावित कॉरिडोर व्यवहार्य पाए जाते हैं, तो आने वाले वर्षों में जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का दायरा और अधिक विस्तृत हो सकता है।

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