Friday, 10 July 2026

नीरजा मोदी स्कूल में शिक्षक योग्यता पर गंभीर सवाल, हाईकोर्ट ने CBSE को निरीक्षण रिपोर्ट व शो-कॉज नोटिस देने के निर्देश दिए


नीरजा मोदी स्कूल में शिक्षक योग्यता पर गंभीर सवाल, हाईकोर्ट ने CBSE को निरीक्षण रिपोर्ट व शो-कॉज नोटिस देने के निर्देश दिए

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नीरजा मोदी स्कूल में 102 नए शिक्षकों में 85 के नॉन-कंप्लायंस का दावा, मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को
जयपुर।
नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण अब केवल एक छात्रा की मृत्यु के मामले तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि विद्यालय की शिक्षक नियुक्तियों, शिक्षकों की योग्यता, स्टाफिंग पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध CBSE निरीक्षण अभिलेखों और न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बीच विद्यालय में शिक्षकों की संख्या में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ, लेकिन इसका संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया।

दस्तावेजों के अनुसार निरीक्षण के दौरान कई शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक योग्यता संबंधी अभिलेख भी उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे विद्यालय की प्रशासनिक पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को लेकर प्रश्न उठे हैं।

दावे के अनुसार वर्ष 2024-26 के दौरान नियुक्त 102 नए शिक्षकों में केवल 17 शिक्षक ही निर्धारित योग्यता के अनुरूप पाए गए, जबकि 85 शिक्षक, यानी लगभग 83 प्रतिशत, नॉन-कंप्लायंस श्रेणी में बताए गए हैं। प्राथमिक शिक्षक यानी PRT श्रेणी में 52 में से सभी 52 शिक्षकों के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने का दावा किया गया है। वहीं, वर्तमान में कार्यरत 151 शिक्षकों में से 115 शिक्षकों, यानी लगभग 76 प्रतिशत, की योग्यता अनुपालन को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।

हाईकोर्ट ने CBSE को दिए निर्देश
इस मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने 25 मई 2026 को पारित आदेश में CBSE को निर्देश दिया कि वह निरीक्षण रिपोर्ट और शो-कॉज नोटिस की प्रति सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ता विद्यालय को उपलब्ध कराए। न्यायालय ने विद्यालय को 21 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

संयुक्त अभिभावक संघ ने उठाए सवाल
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षक योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया और स्टाफिंग से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं, तो यह केवल प्रशासनिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि अभिभावकों के विश्वास और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण में सामने आए तथ्यों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

दिवंगत छात्रा के पिता ने की निष्पक्ष जांच की मांग
दिवंगत छात्रा अमायरा के पिता विजय मीणा ने कहा कि बेटी के साथ हुई घटना के बाद लगातार सामने आ रहे तथ्य बेहद पीड़ादायक हैं। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय में शिक्षक नियुक्ति, योग्यता, स्टाफिंग और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनका परिवार केवल अमायरा के लिए नहीं, बल्कि हर बच्चे की सुरक्षा, जवाबदेही और न्याय के लिए यह लड़ाई लड़ रहा है।

संघ ने स्वतंत्र जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की
संयुक्त अभिभावक संघ ने राज्य सरकार, CBSE और शिक्षा विभाग से मांग की है कि नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण में शिक्षक योग्यता, स्टाफिंग, बाल सुरक्षा व्यवस्था और सभी नियामकीय मानकों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। संघ ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है, ताकि अभिभावकों का शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

1200 से अधिक विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने का दावा
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने दावा किया कि अमायरा प्रकरण के बाद विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली, बच्चों की सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। उनके अनुसार घटना के समय विद्यालय में लगभग 5500 विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का दावा किया जाता था, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 4300 रह गई है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने विद्यालय छोड़ा है। उन्होंने कहा कि यह केवल संख्या में कमी नहीं, बल्कि अभिभावकों के घटते विश्वास का संकेत है। संघ का कहना है कि अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षा, संस्कार और सुरक्षित वातावरण के लिए विद्यालय भेजते हैं, न कि भय, असुरक्षा या अव्यवस्था का सामना करने के लिए।

मामले में विद्यालय प्रबंधन, CBSE और संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होनी है, जिस पर अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई हैं।

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