Friday, 10 July 2026

राजस्थान पुलिस के सरकारी रिकॉर्ड में अब ‘अनुसूचित जाति’ शब्द का होगा प्रयोग, नया सर्कुलर जारी


राजस्थान पुलिस के सरकारी रिकॉर्ड में अब ‘अनुसूचित जाति’ शब्द का होगा प्रयोग, नया सर्कुलर जारी

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जयपुर। राजस्थान पुलिस विभाग के प्रशासनिक कामकाज, सरकारी पत्राचार, जांच रिपोर्टों, एफआईआर से जुड़े आधिकारिक उल्लेखों और विभागीय अभिलेखों में अब संवैधानिक शब्दावली का प्रयोग अनिवार्य किया गया है। कार्यालय अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, राजस्थान की ओर से जारी नए सर्कुलर के अनुसार पुलिस विभाग के सरकारी कामकाज और दस्तावेजों में ‘दलित’ शब्द के स्थान पर अब केवल ‘अनुसूचित जाति’ शब्द का प्रयोग किया जाएगा।

यह आदेश गृह विभाग, राजस्थान सरकार और भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के पूर्व निर्देशों की पालना में जारी किया गया है। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी मामलों, विभागीय पत्राचार, प्रमाण पत्रों, फॉर्म, अभिलेखों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संविधान में मान्य शब्दावली का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

संवैधानिक शब्दावली के प्रयोग पर जोर
नए आदेश के अनुसार हिंदी भाषा में ‘अनुसूचित जाति’ और अंग्रेजी भाषा में ‘Scheduled Caste’ शब्द का प्रयोग किया जाएगा। यदि किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में दस्तावेज तैयार किया जाता है, तो उसमें भी इसी संवैधानिक शब्दावली का उपयुक्त और विधिक अनुवाद ही उपयोग में लाया जाएगा।

पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में पूर्व न्यायिक निर्देशों और केंद्र सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी रिकॉर्ड में शब्दों का चयन संवैधानिक व्यवस्था और विधिक शुद्धता के अनुरूप होना चाहिए। इसी उद्देश्य से पुलिस विभाग के सभी स्तरों पर इस आदेश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

थानों से लेकर जिला पुलिस अधीक्षकों तक निर्देश
02 जुलाई 2026 को जारी इस सर्कुलर की प्रतियां राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, पुलिस आयुक्तालयों, जिला पुलिस अधीक्षकों और संबंधित फील्ड अधिकारियों को भेजी गई हैं। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों और थानों में इस आदेश की प्रभावी पालना सुनिश्चित कराएं।

जयपुर उत्तर पुलिस उपायुक्त कार्यालय की ओर से भी इस आदेश की प्रतिलिपि अतिरिक्त पुलिस उपायुक्तों, सहायक पुलिस आयुक्तों और सभी थानाधिकारियों को भेजकर मैदानी स्तर पर तत्काल अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिसिंग और आमजन पर प्रभाव
इस निर्णय का सीधा असर पुलिस थानों और कार्यालयों में तैयार होने वाले दस्तावेजों, रिपोर्टों और आधिकारिक संवाद पर पड़ेगा। अब किसी व्यक्ति या वर्ग की पहचान का उल्लेख करते समय पुलिस विभाग को संवैधानिक और विधिक शब्दावली का ही उपयोग करना होगा।

प्रशासनिक दृष्टि से यह कदम सरकारी रिकॉर्ड में एकरूपता, संवेदनशीलता और विधिक शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पुलिसिंग व्यवस्था में भाषा के स्तर पर अधिक सावधानी और संवैधानिक मर्यादा का पालन सुनिश्चित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी दस्तावेजों में सही और मान्य शब्दावली का प्रयोग नागरिकों की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों के सम्मान से जुड़ा विषय है। ऐसे में यह आदेश केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज में संवेदनशील और विधिसम्मत भाषा के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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