Friday, 10 July 2026

हाईकोर्ट के आदेश से शिक्षा विभाग में 5 वर्षों की प्रिंसिपल पदोन्नतियों की होगी समीक्षा


हाईकोर्ट के आदेश से शिक्षा विभाग में 5 वर्षों की प्रिंसिपल पदोन्नतियों की होगी समीक्षा

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बीकानेर। राजस्थान हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश के बाद शिक्षा विभाग में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई प्रिंसिपल पदोन्नतियों की समीक्षा का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने 1 अप्रैल 2021 की आधार तिथि के अनुसार वरिष्ठता सूची की समीक्षा करते हुए रिव्यू डीपीसी करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश का असर वर्ष 2021-22 से लेकर अब तक हुई प्रिंसिपल पदोन्नतियों पर पड़ सकता है। साथ ही भविष्य में जिला शिक्षा अधिकारी और उपनिदेशक स्तर तक की पदोन्नतियों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।

वर्ष 2021-22 में राज्य सरकार द्वारा नियमों में संशोधन के बाद व्याख्याताओं और हेडमास्टर्स की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार की गई थी। इस वरिष्ठता सूची में प्रशासनिक अनुभव यानी वेटेज को महत्व दिए जाने के कारण कई जूनियर हेडमास्टर्स वरिष्ठ व्याख्याताओं से ऊपर आ गए थे। इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए अनेक व्याख्याताओं ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया में वास्तविक वरिष्ठता और लागू नियमों का पालन सर्वोपरि है। यदि वरिष्ठता निर्धारण में किसी प्रकार की त्रुटि हुई है, तो उसे सुधारते हुए पात्र कार्मिकों को उनके वैधानिक अधिकारों का लाभ दिया जाना चाहिए।

अदालत के निर्देशों के अनुसार सबसे पहले वर्ष 2021-22 और 2022-23 की प्रिंसिपल डीपीसी की समीक्षा की जाएगी। चूंकि बाद के वर्षों की पदोन्नतियां भी इन्हीं वरिष्ठता सूचियों और डीपीसी के आधार पर आगे बढ़ी थीं, इसलिए वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की डीपीसी भी पुनरीक्षण के दायरे में आ सकती है। इससे शिक्षा विभाग को पूरी पदोन्नति प्रक्रिया को दोबारा व्यवस्थित करना पड़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार इस आदेश से उन व्याख्याताओं को राहत मिल सकती है, जो वरिष्ठ होने के बावजूद संशोधित संयुक्त वरिष्ठता सूची में पीछे चले गए थे। रिव्यू डीपीसी के बाद ऐसे कार्मिकों को वरिष्ठता के अनुरूप प्रिंसिपल पदोन्नति का लाभ मिल सकता है। वहीं, प्रशासनिक वेटेज के आधार पर वरिष्ठता में ऊपर आए हेडमास्टर्स की रैंकिंग में बदलाव संभव है, जिससे उनकी आगामी पदोन्नतियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। विभाग को अब वरिष्ठता सूची, पूर्व डीपीसी और आगामी पदोन्नति प्रक्रिया की गहन समीक्षा करनी होगी, ताकि पदोन्नति में नियमों और वास्तविक वरिष्ठता का सही अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

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