



लंदन/हैरो। यूनाइटेड किंगडम के हैरो, लंदन में राजपुरोहित समाज यूके की ओर से भव्य राजपुरोहित सम्मेलन 2026 का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन में इंग्लैंड के विभिन्न शहरों के साथ यूरोप के अलग-अलग क्षेत्रों से आए समाजबंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी संस्कृति, परंपराओं तथा सामाजिक एकता का परिचय दिया।
कार्यक्रम का संयोजन और नेतृत्व हनवंतसिंघ बाडवा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में मितेश भोजास और वीरेंद्रसिंघ खैरवा का विशेष सहयोग रहा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विदेश में रह रहे समाजबंधुओं को अपनी मातृभूमि, संस्कृति, भाषा और संस्कारों से जोड़ना तथा नई पीढ़ी को राजपुरोहित समाज की गौरवशाली विरासत से परिचित कराना था।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों और अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। पूरे आयोजन में राजस्थानी संस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। समाज के वरिष्ठजनों और युवाओं ने एक मंच पर बैठकर समाज के वर्तमान और भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों में भारतीय संस्कारों को जीवित रखने का संकल्प लिया गया।
वेबिनार के माध्यम से धनारामजी ने किया संबोधित
सम्मेलन की विशेषता यह रही कि आशोत्रा निवासी धनारामजी ने वेबिनार के माध्यम से समाजबंधुओं को संबोधित किया। उन्होंने विदेश में बसे समाजबंधुओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मातृभाषा, संस्कृति और संस्कारों का संरक्षण ही समाज की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने, समाज में एकता बनाए रखने और गौरवशाली परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
पारंपरिक सजावट और राजस्थानी व्यंजनों ने बढ़ाई शोभा
सम्मेलन स्थल की आकर्षक और पारंपरिक सजावट की जिम्मेदारी शकुंतला बाडवा और देवल भोजास ने संयुक्त रूप से निभाई। राजस्थानी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करती मनमोहक सजावट उपस्थित समाजबंधुओं और अतिथियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यक्रम की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का दायित्व राकेशसिंघ मोरखा, विवान धुंधियारी और शिव मुथा ने निभाया। वहीं, टिकट व्यवस्था का सफल संचालन महेंद्रसिंघ धुंधियारी द्वारा किया गया।
सम्मेलन में परोसे गए पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों ने सभी का मन मोह लिया। भोजन व्यवस्था KETRAJ द्वारा की गई। स्वादिष्ट भोजन चारुलता राजपुरोहित अर्थंडी और ललिता राजपुरोहित पुनायतां द्वारा प्रेमपूर्वक तैयार किया गया। दाल-बाटी-चूरमा सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों का समाजबंधुओं ने आनंद लिया।
वरिष्ठजनों ने युवाओं को दिया प्रेरणादायी संदेश
कार्यक्रम के दौरान समाज के वरिष्ठजन भमरजी सांकरणा, विनोदजी सिरोही, रमेशजी कराड़ी और आनंदजी लेडी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने युवा पीढ़ी को समाज, संस्कृति, संगठन और परंपराओं के प्रति समर्पित रहने का प्रेरणादायी संदेश दिया।
सम्मेलन का समापन सामूहिक भोजन, आत्मीय मिलन और समाज की एकता को और अधिक मजबूत बनाने के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित समाजबंधुओं ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे विदेश की धरती पर राजपुरोहित समाज की संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को जीवंत रखने वाला प्रेरणादायी आयोजन बताया।
राजपुरोहित सम्मेलन 2026 ने यह संदेश दिया कि हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद समाज अपनी मातृभाषा, संस्कृति और संस्कारों को संजोए हुए है और नई पीढ़ी तक उन्हें गर्व के साथ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।