Wednesday, 08 July 2026

राजस्थान सौर ऊर्जा में बनेगा वैश्विक केंद्र, इंटरनेशनल सोलर अलायंस के साथ फ्रेमवर्क फॉर एक्शन पर हस्ताक्षर


राजस्थान सौर ऊर्जा में बनेगा वैश्विक केंद्र, इंटरनेशनल सोलर अलायंस के साथ फ्रेमवर्क फॉर एक्शन पर हस्ताक्षर

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जयपुर। राजस्थान सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसके साथ 128 देशों के समूह इंटरनेशनल सोलर अलायंस ने “फ्रेमवर्क फॉर एक्शन-एडवांस क्लीन एनर्जी, ड्रिवन सस्टेनेबल डवलपमेंट” पर हस्ताक्षर किए हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर ऊर्जा सचिव आरती डोगरा और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के महानिदेशक आशीष खन्ना ने इस फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत राजस्थान में सौर ऊर्जा के विस्तार, प्रसारण, वितरण, ऊर्जा भंडारण और ग्रिड आधुनिकीकरण को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों की अगुवाई कर रहा है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस भी प्रधानमंत्री की इसी सोच का परिणाम है, जिसने सौर ऊर्जा को वैश्विक जन-आंदोलन का रूप दिया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आईएसए के साथ यह साझेदारी स्वच्छ, सुरक्षित और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रदेश पारंपरिक ऊर्जा से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा। सौर ऊर्जा के विस्तार के साथ प्रसारण और वितरण की व्यापक योजना तैयार की जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति में बड़ा सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियां इसे देश का अग्रणी अक्षय ऊर्जा राज्य बनाती हैं। वर्तमान में राज्य में 22 गीगावॉट से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता है, जो देश में सर्वाधिक है। प्रदेश की कुल स्वच्छ ऊर्जा क्षमता करीब 44 गीगावॉट है। राजस्थान इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी के तहत 125 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पीएम कुसुम योजना के माध्यम से 4 गीगावॉट से अधिक सौर क्षमता से प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही बैटरी एनर्जी स्टोरेज और सौर ऊर्जा के बेहतर एकीकरण के लिए सहायक नीतियां भी बनाई गई हैं।

एआई और डिजिटल तकनीक से मजबूत होगा बिजली तंत्र
फ्रेमवर्क फॉर एक्शन के तहत राजस्थान के लिए वर्ष 2030-35 की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एनर्जी ट्रांजिशन प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, प्रसारण एवं वितरण तंत्र का सुदृढ़ीकरण, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण, ऊर्जा दक्षता, मांग प्रबंधन, निवेश योग्य परियोजनाओं की पहचान, ऊर्जा मॉडलिंग, संस्थागत क्षमता निर्माण और नीतिगत सुधार जैसे विषय शामिल होंगे।

इसके अंतर्गत एआई और डिजिटलाइजेशन आधारित कार्य भी किए जाएंगे। विशेष रूप से अजमेर विद्युत वितरण निगम में डिजिटल ट्विन तकनीक पर आधारित पायलट परियोजना शुरू की जाएगी। इससे विद्युत मांग का सटीक आकलन, नेटवर्क की बेहतर योजना, नवीकरणीय ऊर्जा का प्रभावी समावेशन और उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

बिजली आपूर्ति में आएगा सुधार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जैसे-जैसे ग्रिड में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है, पावर सिस्टम को और अधिक अनुकूल बनाना जरूरी है। इसके लिए एनर्जी स्टोरेज, डिमांड साइड मैनेजमेंट, डिजिटलाइजेशन और स्मार्ट ग्रिड जैसे उपायों पर काम किया जाएगा। राज्य में प्रसारण और वितरण तंत्र को मजबूत करने, ग्रिड क्षमता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

ऊर्जा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हीरालाल नागर ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है। आईएसए के साथ हुए फ्रेमवर्क फॉर एक्शन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर विद्युत सेवाओं में व्यापक सुधार किया जाएगा।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा कि राजस्थान पहला प्रदेश है, जिसके साथ आईएसए ने फ्रेमवर्क फॉर एक्शन हस्ताक्षरित किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लागू की गई अनुकूल नीतियों और योजनाओं के कारण राजस्थान सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है।

पीएम सूर्य घर योजना में गति लाने के निर्देश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना में अपेक्षित गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य सचिव को इस योजना की नियमित मॉनिटरिंग करने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रभावी और दूरगामी कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।

उन्होंने पीएम कुसुम योजना, आरडीएसएस, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश के मौसम में विद्युत दुर्घटनाएं नहीं हों और घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगों तथा किसानों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया, ऊर्जा शासन सचिव आरती डोगरा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर और जोधपुर-अजमेर डिस्कॉम के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

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