



ऊधम सिंह नगर। किच्छा के पिपलिया मोड़ स्थित खान फार्म की आठ एकड़ जमीन को लेकर दो पक्षों के दावे सामने आने के बाद प्रशासन ने फिलहाल विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच और दलीलें सुनने के बाद यह आदेश जारी किया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने खान फार्म के बाहर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के बाद विवादित स्थल पर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे और किसी भी प्रकार का तनाव न बढ़े।
सुनवाई के दौरान तहसील परिसर में कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। विवाद को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। नसरिन सांगा की ओर से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा पर आरोप लगाए गए हैं, वहीं भाजपा ने भी इस मामले में प्रियंका गांधी वाड्रा से जवाब मांगा है। हालांकि, प्रशासन ने फिलहाल पूरे मामले को भूमि स्वामित्व और कब्जे से जुड़े विवाद के रूप में देखते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई है।
जानकारी के अनुसार, किच्छा के पिपलिया मोड़ पर स्वर्गीय कुलसुम खान का आठ एकड़ भूमि पर खान फार्म स्थित है। इस भूमि पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी और स्वर्गीय रिचर्ड वाड्रा की पत्नी सायरा वाड्रा ने दावा जताया है। उनका कहना है कि यह फार्म उनकी बुआ की वसीयत के आधार पर उनकी वैध संपत्ति है। वहीं, स्वर्गीय कुलसुम खान की बहन नसरिन सांगा ने भी इस संपत्ति पर अपना दावा पेश किया है।
सायरा वाड्रा की ओर से आरोप लगाया गया है कि नसरिन सांगा ने फार्म पर काम कर रहे मजदूरों को हटाकर जबरन कब्जा कर लिया। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ भी कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे थे। बताया गया कि उन्होंने विरोध जताते हुए आत्मदाह की चेतावनी भी दी।
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों को एडीएम कार्यालय में स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। निर्धारित समय पर सायरा वाड्रा की ओर से अधिवक्ता पीयूष पंत और नसरिन सांगा की ओर से अधिवक्ता शुभम छाबड़ा एडीएम कार्यालय पहुंचे और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए।
अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद निर्देश दिए कि जो पक्ष मौके पर काबिज है, वह वर्तमान स्थिति में बना रहेगा और जो पक्ष बाहर है, वह बाहर रहेगा। प्रशासन ने दोनों पक्षों को अदालत के माध्यम से विधिक समाधान तलाशने की सलाह दी है।
एडीएम ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष द्वारा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया गया तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विस्तृत जांच पूरी होने तक विवादित भूमि की वर्तमान स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।