Tuesday, 30 June 2026

बयाना विधायक ऋतु बनावत के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, समन से बचने पर एक लाख का हर्जाना


बयाना विधायक ऋतु बनावत के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, समन से बचने पर एक लाख का हर्जाना

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बयाना से निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका खारिज कर दी है। हालांकि अदालत ने कोर्ट समन से बचने की कोशिश करने पर ऋतु बनावत पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने बयाना से उम्मीदवार रहे पुरुषोत्तम लाल की चुनाव याचिका पर यह फैसला सुनाया।

अदालत ने समन तामील से बचने की कोशिश पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऋतु बनावत ने जानबूझकर और सोच-समझकर ऐसे हथकंडे अपनाए, जिससे वह कोर्ट में उपस्थिति से बच सकें। इस कारण अदालत को समन तामील कराने के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ी और विधानसभा सचिव के जरिए समन तामील कराने पड़े।

संपत्ति और दायित्वों की जानकारी छिपाने का लगाया था आरोप

याचिका में कहा गया था कि विधानसभा चुनाव 2023 में याचिकाकर्ता पुरुषोत्तम लाल और ऋतु बनावत ने बयाना विधानसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया था। चुनाव में याचिकाकर्ता को 689 वोट मिले, जबकि ऋतु बनावत को एक लाख से अधिक वोट मिलने पर विजयी घोषित किया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि नामांकन के दौरान ऋतु बनावत ने अपनी संपत्तियों और दायित्वों की पूरी और सही जानकारी नहीं दी। याचिकाकर्ता ने इसे भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में बताते हुए बनावत का नामांकन रद्द करने और निर्वाचन निरस्त करने की मांग की थी।

बनावत की ओर से कहा गया- मूल सूचनाएं सही दी गईं

ऋतु बनावत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि बनावत की ओर से आवश्यक मूल सूचनाएं सही तरीके से दी गई थीं। उन्होंने कहा कि चुनाव खर्च के लिए खोले गए बैंक खाते की जानकारी देना बाध्यकारी नहीं था।

बनावत की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि गृहणी होने के बावजूद कृषि आय होना संभव है। ऐसे में याचिका में लगाए गए आरोप निर्वाचन निरस्त करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनाते हैं। इसलिए याचिका को खारिज किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा- आरोप चुनाव निरस्त करने के लिए पर्याप्त नहीं

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि याचिका में लगाए गए आरोप ऋतु बनावत का निर्वाचन निरस्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित उम्मीदवार की संपत्तियों से जुड़े मामूली तकनीकी और महत्वहीन गैर-खुलासों के आधार पर जनता की पसंद को रद्द करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव निरस्त करने के लिए ठोस और पर्याप्त आधार होना आवश्यक है।

समन से बचने पर जताई नाराजगी

याचिका खारिज करने के बावजूद अदालत ने ऋतु बनावत के आचरण पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने समन से बचने के लिए जानबूझकर प्रयास किए, जिसके चलते न्यायालय को समन तामील कराने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनानी पड़ी।

इसी आधार पर अदालत ने ऋतु बनावत पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। अदालत के इस आदेश के बाद जहां बनावत को निर्वाचन याचिका में राहत मिली है, वहीं समन से बचने के प्रयास पर उन्हें आर्थिक दंड का सामना करना पड़ा है।

    Previous
    Next

    Related Posts