Monday, 29 June 2026

यमुना जल समझौते पर टीकाराम जूली ने उठाए सवाल, बोले- ढाई साल से सिर्फ कागजी MOU-MOA का खेल


यमुना जल समझौते पर टीकाराम जूली ने उठाए सवाल, बोले- ढाई साल से सिर्फ कागजी MOU-MOA का खेल

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोमवार को हुए यमुना जल समझौते का स्वागत करते हुए भाजपा सरकार की नीयत और योजना के धरातल पर उतरने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जूली ने कहा कि प्रदेश की जनता पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है, लेकिन सरकार केवल कागजी समझौतों की राजनीति कर रही है।

टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि ढाई साल से यमुना जल के नाम पर कभी एमओयू तो कभी एमओए किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर अब तक कोई ठोस काम दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है तो उसे योजना की डीपीआर, बजट, समयसीमा और फंडिंग स्रोत जनता के सामने स्पष्ट करने चाहिए।

चार महीने का वादा, ढाई साल बाद भी डीपीआर नहीं: जूली

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पुराने दावों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में सरकार ने दावा किया था कि इस योजना की डीपीआर महज 4 महीने में तैयार हो जाएगी। जूली ने सवाल उठाया कि ढाई साल बीत जाने के बाद भी डीपीआर कहां है।

उन्होंने कहा कि सरकार कभी एमओयू करती है और कभी एमओए, लेकिन धरातल पर एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ा है। जूली ने इसे जनता के साथ छलावा बताते हुए कहा कि पानी जैसे गंभीर विषय पर केवल घोषणाओं और कार्यक्रमों से काम नहीं चलेगा।

हरियाणा की शर्त पर भी उठाए सवाल

टीकाराम जूली ने हरियाणा सरकार के रुख को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस समझौते की बुनियाद ही कमजोर दिखाई देती है, क्योंकि हरियाणा के मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि राजस्थान को यमुना का केवल अधिशेष जल यानी अतिरिक्त पानी दिया जाएगा।

जूली ने सवाल किया कि जब यमुना में अतिरिक्त पानी ही उपलब्ध नहीं होगा, तो राजस्थान के प्यासे क्षेत्रों को क्या मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि समझौते के तहत राजस्थान को पानी की वास्तविक, सुनिश्चित और समयबद्ध उपलब्धता कैसे होगी।

33 हजार करोड़ की योजना, फंडिंग का स्रोत अस्पष्ट

नेता प्रतिपक्ष ने योजना के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस पूरी परियोजना की लागत करीब 33 हजार करोड़ रुपए बताई जा रही है, लेकिन इतनी बड़ी राशि कहां से आएगी, यह सरकार ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है।

जूली ने कहा कि बिना बजट, बिना फंडिंग स्रोत और बिना स्पष्ट रोडमैप के इतनी बड़ी परियोजना को कैसे पूरा किया जाएगा, यह समझ से परे है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह जनता को बताए कि परियोजना के लिए धनराशि राज्य सरकार देगी, केंद्र सरकार देगी या कोई अन्य वित्तीय मॉडल अपनाया जाएगा।

जनता को तारीख और रोडमैप बताए सरकार

टीकाराम जूली ने कहा कि राजस्थान के लोगों को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि पानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह यह स्पष्ट करे कि यमुना का पानी राजस्थान में कब तक पहुंचेगा, किन जिलों को कब लाभ मिलेगा और परियोजना की चरणबद्ध कार्ययोजना क्या है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो उसे डीपीआर, वित्तीय स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण की समयसीमा सार्वजनिक करनी चाहिए। जूली ने कहा कि पानी के नाम पर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है।

भाजपा सरकार पर कागजी राजनीति का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यमुना जल समझौते को राजनीतिक उपलब्धि बताकर प्रचार कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि योजना अभी भी कागजों में ही है। उन्होंने कहा कि शेखावाटी सहित प्रदेश के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों की जनता लंबे समय से राहत की उम्मीद कर रही है, लेकिन उसे केवल घोषणाएं मिल रही हैं।

जूली ने कहा कि कांग्रेस इस समझौते का विरोध नहीं करती, लेकिन सरकार को इसके क्रियान्वयन को लेकर ईमानदार और पारदर्शी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीति नहीं, बल्कि ठोस परिणाम जरूरी हैं।

Previous
Next

Related Posts