



जयपुर। जयपुर के जगतपुरा इलाके में मुख्यमंत्री के वीआईपी काफिले के लिए रास्ता साफ कराने के दौरान मोमोज वेंडर रेशु गुप्ता पर खौलता पानी गिरने का मामला अब राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी चर्चा का विषय बन गया है। पीड़ित युवती रेशु गुप्ता के समर्थन में यूपी के विभिन्न संगठनों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है।
रेशु गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले की रहने वाली हैं। पिता के निधन के बाद वह अपनी बहन के साथ आजीविका कमाने जयपुर आई थीं। अब यूपी से संचालित संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार से रेशु की सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक रोजगार की व्यवस्था करने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश से संचालित ‘रेहड़ी-पटरी संचालक राष्ट्रीय संगठन’ ने रेशु गुप्ता मामले में सक्रिय रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय महिला आयोग और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग को पत्र भेजा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम किशोर गुप्ता की ओर से भेजे गए पत्र में रेशु गुप्ता की पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड क्षेत्र में हुई घटना का शिकार रेशु गुप्ता उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले की मूल निवासी हैं। वर्ष 2020 में उनके पिता लाल बहादुर गुप्ता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी रेशु पर आ गई थी। इसी कारण वह अपनी बहन के साथ रोजगार की तलाश में जयपुर आई थीं।
संगठन ने राष्ट्रीय महिला आयोग और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग से इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह मामला केवल एक युवती के साथ हुई दुर्घटना या लापरवाही का नहीं, बल्कि गरीब और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला की सुरक्षा, सम्मान और आजीविका से जुड़ा हुआ है।
पत्र में मांग की गई है कि महिला आयोग पीड़िता की सुरक्षा, उपचार, पुनर्वास और भविष्य की आजीविका को लेकर उचित कदम उठाए। संगठन ने कहा कि रेशु गुप्ता जैसी महिलाएं विपरीत परिस्थितियों में मेहनत कर परिवार चलाती हैं, इसलिए सरकार और संस्थाओं को उनके साथ खड़ा होना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में रेशु गुप्ता के निजी पुनर्वास के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से होने वाले रोजगार प्रवासन का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन ने मांग की है कि रेशु गुप्ता की पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के किसी प्रमुख शहर में विधिवत वेंडिंग जोन के भीतर स्थान उपलब्ध कराया जाए।
संगठन का कहना है कि इससे रेशु को सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार का नया अवसर मिल सकेगा। साथ ही वह अपने गृह राज्य में रहकर सुरक्षित माहौल में आजीविका चला सकेंगी।
पत्र में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के युवाओं, गरीब परिवारों और रेहड़ी-पटरी संचालकों के लिए प्रदेश के भीतर ही अधिक से अधिक रोजगार अवसर और सुव्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित किए जाने चाहिए। संगठन ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर सुरक्षित और व्यवस्थित रोजगार मिलेगा तो गरीब नागरिकों को आजीविका के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।
संगठन ने कहा कि रेशु गुप्ता का मामला उन हजारों युवाओं की पीड़ा को सामने लाता है, जो परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए अपने घर-गांव से दूर जाकर असंगठित क्षेत्र में काम करने को मजबूर होते हैं।
जगतपुरा में हुई घटना के बाद से रेशु गुप्ता को न्याय और पुनर्वास दिलाने की मांग लगातार उठ रही है। स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर नाराजगी सामने आई थी। अब उत्तर प्रदेश के संगठनों के सक्रिय होने से यह मामला दो राज्यों के सामाजिक और प्रशासनिक विमर्श का विषय बन गया है।
संगठनों ने मांग की है कि पीड़िता को केवल आर्थिक सहायता देकर मामला समाप्त नहीं किया जाए, बल्कि उसके स्थायी पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।