



केंद्र सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कार्यकाल एक बार फिर तीन साल के लिए बढ़ा दिया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति यानी एसीसी ने उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। नए आदेश के अनुसार तुषार मेहता 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2029 तक या अगले आदेश तक सॉलिसिटर जनरल के पद पर बने रहेंगे।
तुषार मेहता अक्टूबर 2018 में पहली बार भारत के सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए थे। इसके बाद उनका कार्यकाल पहले भी बढ़ाया जा चुका है और अब उन्हें एक और तीन वर्षीय विस्तार दिया गया है। इस तरह वे केंद्र सरकार के प्रमुख विधिक अधिकारियों में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
सॉलिसिटर जनरल भारत सरकार के दूसरे सबसे बड़े विधि अधिकारी माने जाते हैं। वे केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और अन्य संवैधानिक मंचों पर महत्वपूर्ण मामलों में पक्ष रखते हैं। संवैधानिक, नीतिगत और राष्ट्रीय महत्व के मामलों में सॉलिसिटर जनरल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
तुषार मेहता ने अपने कार्यकाल के दौरान कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों में केंद्र सरकार का पक्ष रखा है। इनमें अनुच्छेद 370, राष्ट्रीय सुरक्षा, चुनाव सुधार, डिजिटल नियमन, केंद्र-राज्य विवाद और अन्य संवैधानिक विषयों से जुड़े मामले शामिल रहे हैं। उनकी पुनर्नियुक्ति को सरकार की ओर से उनके विधिक अनुभव और निरंतरता पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाली विधिक टीम में सॉलिसिटर जनरल की भूमिका केंद्रीय होती है। सरकार की नीतियों, कानूनों और संवैधानिक फैसलों से जुड़े मामलों में वे न्यायालय के समक्ष सरकार का दृष्टिकोण रखते हैं। ऐसे में तुषार मेहता का कार्यकाल बढ़ना आने वाले वर्षों में सरकार की कानूनी रणनीति की निरंतरता के रूप में भी देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल के साथ सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत कुछ अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के कार्यकाल को भी आगे बढ़ाया गया है। इससे केंद्र सरकार की विधिक टीम में स्थिरता बनी रहेगी और लंबित महत्वपूर्ण मामलों में निरंतरता के साथ पैरवी हो सकेगी।
तुषार मेहता गुजरात से आते हैं और वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में लंबे समय से संवैधानिक और सरकारी मामलों में सक्रिय रहे हैं। सॉलिसिटर जनरल बनने से पहले भी वे केंद्र और राज्य सरकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधिक मामलों में पेश हो चुके हैं।
कानूनी गलियारों में तुषार मेहता की पुनर्नियुक्ति को महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार से जुड़े कई संवैधानिक और नीतिगत मामले लंबित हैं। ऐसे में सॉलिसिटर जनरल के रूप में उनका विस्तारित कार्यकाल सरकार के लिए विधिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।