



जयपुर। राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो गया है। हालिया नियुक्तियों के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना कम है, लेकिन निगम, बोर्ड, आयोग और अन्य संवैधानिक व प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को केंद्र नेतृत्व की ओर से कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर आगे बढ़ने की सहमति मिल गई है। इसी क्रम में राजस्थान लोक सेवा आयोग और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जुड़ी नियुक्तियां सामने आ चुकी हैं।
राजस्थान लोक सेवा आयोग में हाल ही में बदलाव देखने को मिला है। आयोग में कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी और दो नए सदस्यों की नियुक्ति को सरकार की ओर से प्रशासनिक और संस्थागत निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसी तरह राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद पर भी नियुक्ति हो चुकी है।
अब माना जा रहा है कि राज्य में अन्य प्रमुख बोर्डों, आयोगों और निगमों में भी जल्द नियुक्तियां की जा सकती हैं। इनमें 20 सूत्री कार्यक्रम के उपाध्यक्ष और सदस्य, राजस्थान खेल परिषद,अध्यक्ष,राजस्थान आवासन मंडल के अध्यक्ष और सदस्य, राजस्थान वेयर हाउस निगम के अध्यक्ष, राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष और सदस्य सहित कई महत्वपूर्ण पद शामिल बताए जा रहे हैं।
इसके साथ ही भाव अभियोग, अधीनस्थ कर्मचारी चयन बोर्ड, मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य संस्थागत पदों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ पदों पर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को अवसर मिल सकता है, जबकि कुछ पदों पर सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ हाल ही में दो दिन तक साथ दौरे पर रहे थे। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इस दौरान संगठन और सरकार से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श हुआ है।
इन पदों को पाने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने सक्रियता बढ़ा दी है। राजनीतिक हलकों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, राजेंद्र राठौड़, रामचरण बोहरा, मुकेश दाधीच, सुमन शर्मा, संतोष अहलावत, विजय बैसला और सुनीता बैसला, लक्ष्मीकांत भारद्वाज,पंकज जोशी,कुछ पूर्व विधायकसहित संघ से जुड़े हुए कई नामों की चर्चा है। हालांकि इन नामों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक चर्चा यह भी है कि वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने फिलहाल किसी निगम या बोर्ड का पद लेने में रुचि नहीं दिखाई है। हालांकि भाजपा संगठन और सरकार के स्तर पर वरिष्ठ नेताओं को समायोजित करने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में कुछ नेताओं को संगठनात्मक, राजनीतिक या संस्थागत जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राजस्थान में लंबे समय से राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर अब सरकार के अगले फैसलों पर टिकी है। भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही निगम-बोर्ड और आयोगों में नियुक्तियां कर संगठन से जुड़े सक्रिय चेहरों को जिम्मेदारी देगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार को टालते हुए राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से सरकार और संगठन के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है। इससे वरिष्ठ नेताओं, संगठन में सक्रिय पदाधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रभावशाली चेहरों को समायोजित करने का रास्ता खुलेगा।
आगामी निकाय और पंचायतीराज चुनावों को देखते हुए भी ये नियुक्तियां राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। भाजपा संगठन चाहेगा कि नियुक्तियों के जरिए कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़े और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में संगठन की भूमिका और मजबूत हो।
फिलहाल प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अटकलें तेज हैं। आरपीएससी और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से शुरुआत होने के बाद अब सबकी नजर 20 सूत्री कार्यक्रम, महिला आयोग, राजस्थान खेल परिषद,आवासन मंडल, वेयर हाउस निगम, राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड तथा राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बोर्ड, अधीनस्थ कर्मचारी बोर्ड और सूचना आयोग जैसे पदों पर होने वाले संभावित फैसलों पर है।