



कोटा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के एसएसबी ब्लॉक का दौरा कर सीजेरियन डिलीवरी के बाद प्रभावित महिलाओं और उनके परिजनों से मुलाकात की। अस्पताल में भर्ती महिलाओं के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के बाद उन्होंने पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि यह कोई सामान्य चिकित्सकीय घटना नहीं है, बल्कि एक विशेष और चिंताजनक मामला है। उन्होंने बताया कि सीजेरियन डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि पांच अन्य महिलाएं अब भी उपचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित महिलाओं की किडनी पर गंभीर असर पड़ा है और कई मरीजों को नियमित रूप से डायलिसिस कराना पड़ रहा है। किसी को सप्ताह में तीन बार, किसी को दो बार और किसी को एक बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अधिकांश प्रभावित महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। ऐसे में बीमारी और लंबे इलाज के कारण उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इन परिवारों की सहायता के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि मृत महिलाओं की फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है। चिकित्सकों के अनुसार रिपोर्ट आने में चार से छह महीने का समय लग सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट को प्राथमिकता के आधार पर जल्द प्राप्त करने के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि अब तक कोई स्पष्ट रूप से यह नहीं बता पा रहा है कि प्रसव के बाद महिलाओं की हालत अचानक इतनी गंभीर क्यों हुई। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें भी इसकी वजह का पता नहीं है। गहलोत ने कहा कि मामले की जांच के लिए एम्स और राज्य सरकार की विशेषज्ञ टीमें अस्पताल पहुंची हैं, जिसका वे स्वागत करते हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट और निष्कर्षों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवाल उठाया कि यदि निजी अस्पतालों में भी समान दवाइयों और उपचार पद्धतियों का उपयोग किया जाता है तो वहां ऐसी घटनाएं सामने क्यों नहीं आईं और सरकारी अस्पताल में ही इतनी गंभीर स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाने की मांग की कि उपचार, दवाओं, संक्रमण नियंत्रण या अस्पताल प्रबंधन के किस स्तर पर कमी रह गई, जिससे यह स्थिति पैदा हुई।