



प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगा रहा है। इसी बीच राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
दरअसल, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने शनिवार को भीलवाड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि "एक राज्य, एक चुनाव" के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार अक्टूबर से दिसंबर के बीच हर हाल में चुनाव करा लेगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है। ऐसे में अरुण चतुर्वेदी का बयान न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने के लिए सरकार को प्रेरित करने जैसा प्रतीत होता है।
संयम लोढ़ा ने कहा कि यह बयान न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की श्रेणी में आता है और इसे अवमानना के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने अरुण चतुर्वेदी से अपना बयान वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से न्यायालय के आदेशों के सम्मान और उनकी पालना की बात करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि अरुण चतुर्वेदी राज्य की आर्थिक स्थिति या वित्तीय विषयों पर टिप्पणी करते तो बात समझ में आती, लेकिन चुनाव कार्यक्रम को लेकर दिया गया उनका बयान करोड़ों नागरिकों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के रास्ते में बाधा उत्पन्न करने वाला है। यह किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
पूर्व विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अरुण चतुर्वेदी अगले 15 दिनों के भीतर अपना वक्तव्य वापस नहीं लेते हैं, तो उनके खिलाफ न्यायालय में अवमानना की कार्रवाई प्रस्तुत की जाएगी। इस बयान के बाद पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।