



भागवत कथा के दौरान लीलाधर महाराज ने कहा कि केवल भागवत कथा का श्रवण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके संदेशों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को सदाचार, धर्म और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करती है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति की जानकारी देना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि बचपन से ही बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराया जाए तो उनके संस्कार मजबूत होंगे और वे जीवन में सही मार्ग का चयन कर सकेंगे।
जयपुर के आतिश मार्केट स्थित भोमिया जी ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रुक्मिणी विवाह लीलाधर महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भागवत कथा में वृंदावन वृंदावन व्यास पीठ की कथा वाचक कृष्णप्रिया कौशिकी महाराज ने रुक्मिणी विवाह का वर्णन सुनाया।
लीलाधर महाराज ने कहा कि बच्चों को धार्मिक आयोजनों और सत्संगों में अवश्य लाना चाहिए, ताकि उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों के आदर्शों की जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कथा के दौरान उन्होंने पारिवारिक जीवन में सौहार्द और सम्मान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवार में परस्पर सम्मान, प्रेम और सहयोग की भावना बनी रहनी चाहिए। विशेष रूप से महिलाओं से उन्होंने परिवार में सुख-शांति और सामंजस्य बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शांत और सकारात्मक वातावरण से परिवार में खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है।