Sunday, 07 June 2026

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा राजस्थान, वागड़ क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना


मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा राजस्थान, वागड़ क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना

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जयपुर। राजस्थान सरकार प्रदेश को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के मार्गदर्शन में बांसवाड़ा जिले में निर्माणाधीन ‘अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना’ को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना वागड़ अंचल, विशेष रूप से जनजाति बहुल क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक और कृषि विकास के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

परियोजना के पूर्ण होने पर बांसवाड़ा जिले की बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी और गांगड़तलाई तहसीलों के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के माध्यम से वर्षभर सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे करीब 3.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। किसानों को नियमित सिंचाई सुविधा मिलने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, फसलों का रकबा विस्तारित होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना के तहत 102 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर का निर्माण किया जा रहा है। इसमें 22.50 किलोमीटर लंबाई की सुरंगें, कट एंड कवर संरचनाएं, एक्वाडक्ट और साइफन जैसी आधुनिक इंजीनियरिंग संरचनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त करीब 230 अन्य महत्वपूर्ण नहरी संरचनाओं का भी निर्माण किया जा रहा है, जिनमें सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन, रोड ब्रिज, हेड रेगुलेटर और एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर शामिल हैं।

परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें अत्याधुनिक प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसके तहत लगभग 200 डिग्गियों का निर्माण प्रस्तावित है, जहां तक मुख्य नहर से एमएस और डीआई पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। इसके बाद लगभग 5 हजार किलोमीटर लंबा भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क विकसित कर खेतों तक प्रेसराइज्ड सिंचाई प्रणाली से जल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जल की बर्बादी कम होगी और कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी।

पूरी परियोजना का संचालन और निगरानी आधुनिक स्काडा (SCADA) प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। यह तकनीक जल प्रवाह, दबाव और वितरण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगी। इससे किसानों को समान रूप से जल उपलब्ध कराने, जल हानि को कम करने और सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

वर्तमान में परियोजना के अंतर्गत 42 किलोमीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी है। इनटेक स्ट्रक्चर और स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि सुरंग, एक्वाडक्ट, साइफन और भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण विभिन्न स्थानों पर तेजी से किया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रियाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अब तक 67 गांवों की 211 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 47 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए जा चुके हैं तथा करीब 15 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है।

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र के किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ेगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही भूजल स्तर में सुधार, जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना वागड़ क्षेत्र के जनजाति बहुल इलाकों के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

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