



जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर वर्षों पुराने विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि यदि सोनिया गांधी उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहती थीं तो वह उस जिम्मेदारी को स्वीकार करने से कैसे इनकार कर सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय उनके खिलाफ एक साजिश रची गई, जिसके कारण यह धारणा बनाई गई कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते और कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहते।
जयपुर स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि उस दौर में उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रचारित किया गया कि वह मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं और राष्ट्रीय राजनीति में नहीं जाना चाहते, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी। उनके अनुसार परिस्थितियां इस प्रकार बनाई गईं कि लोगों को लगा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष बनने के इच्छुक नहीं हैं।
गहलोत ने कहा कि वह स्वयं कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए तैयार थे, लेकिन घटनाक्रम इस तरह आगे बढ़ा कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और वह अनावश्यक रूप से विवादों में घिर गए। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक जीवन की एक बड़ी साजिश बताते हुए कहा कि उस समय वह पूरे घटनाक्रम को सही ढंग से समझ नहीं पाए और परिणामस्वरूप उन्हें बदनामी झेलनी पड़ी।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व ने अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का प्रमुख दावेदार माना था। उस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन पर्यवेक्षक के रूप में जयपुर आए थे। उस समय यह चर्चा थी कि गहलोत मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली जाकर संगठन की कमान संभालेंगे। हालांकि बाद में घटनाक्रम बदल गया और कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से उनका नाम बाहर हो गया।
पूर्व मुख्यमंत्री के ताजा बयान को कांग्रेस के उस दौर के घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत के इस बयान के जरिए वह यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष बनने का अवसर ठुकराया नहीं था, बल्कि परिस्थितियों और राजनीतिक घटनाक्रम के कारण वह पद तक नहीं पहुंच सके।