



थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादले, पदोन्नत अधिकारियों की लंबित पोस्टिंग और कथित स्थानांतरण अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन; महासंघ ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग उठाई
जयपुर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजस्थान में भी शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के बैनर तले रविवार को जयपुर में बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी सड़कों पर उतरे तथा दिलावर से इस्तीफा लेने और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। महासंघ ने इससे पहले भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और हालिया तबादला प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मंत्री का इस्तीफा मांगा था।
जयपुर के बाइस गोदाम सर्किल के निकट आयोजित विरोध प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षक और कर्मचारी पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग में लंबे समय से बनी प्रशासनिक अनिश्चितता, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले नहीं होने, पदोन्नत अधिकारियों को समय पर पदस्थापन नहीं मिलने और स्थानांतरण प्रक्रिया में कथित भेदभाव को प्रमुख मुद्दा बनाया।
महासंघ का कहना है कि तृतीय श्रेणी शिक्षक वर्षों से पारदर्शी स्थानांतरण नीति का इंतजार कर रहे हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि स्थानांतरण में गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों, विधवाओं, परित्यक्ता महिलाओं, दिव्यांग कर्मचारियों और पति-पत्नी प्रकरणों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई।
राजस्थान विधानसभा में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने फरवरी 2026 में कहा था कि मौजूदा नियमों में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण का प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया था कि व्यापक स्थानांतरण नीति तैयार की जा रही है और सक्षम स्तर से उसकी स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे निर्णय लिया जा सकेगा।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि तबादलों पर लंबे समय से बनी अनिश्चितता के कारण दूरदराज के जिलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारी महासंघ ने आरोप लगाया कि पदोन्नति प्राप्त कर चुके अनेक प्रधानाचार्यों और उप-प्रधानाचार्यों को लंबे समय से नई पोस्टिंग नहीं दी गई है। इससे एक ओर पदोन्नत अधिकारियों में असंतोष है, वहीं दूसरी ओर कई विद्यालयों में प्रशासनिक पद खाली रहने से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
संगठन ने शारीरिक शिक्षकों के नियमितीकरण में देरी और दिव्यांग कर्मचारियों के प्रमाण-पत्रों की बार-बार जांच कराए जाने पर भी आपत्ति जताई। महिला शिक्षिकाओं के निजी मोबाइल फोन की कथित जांच को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने निजता और गरिमा के उल्लंघन का आरोप लगाया।
महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन सौंपकर शिक्षा मंत्री को पद से हटाने, स्पष्ट एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने तथा लंबित पदोन्नति और पदस्थापन आदेश शीघ्र जारी करने की मांग रखी।
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि सरकार ने उनकी मांगों पर समयबद्ध निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जा सकता है। कार्य बहिष्कार और विद्यालयों में तालाबंदी जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे भ्रष्टाचार और तबादलों में लेन-देन के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई व्यक्ति यह प्रमाणित कर दे कि उन्होंने किसी शिक्षक के स्थानांतरण के बदले एक रुपया भी लिया है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। मंत्री पक्ष का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों को कुछ संगठन गलत रूप दे रहे हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे अथवा प्रदर्शनकारियों की मांगों पर किसी औपचारिक निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।