Saturday, 06 June 2026

सीकर मारपीट प्रकरण पर डोटासरा और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा आमने-सामने, भ्रष्टाचार के आरोपों पर इस्तीफे तक की चुनौती


सीकर मारपीट प्रकरण पर डोटासरा और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा आमने-सामने, भ्रष्टाचार के आरोपों पर इस्तीफे तक की चुनौती

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जयपुर। सीकर में कृषि विभाग की छापेमारी टीम के कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटना अब राजनीतिक तूल पकड़ती जा रही है। इस मामले को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के बीच सोशल मीडिया मंच X पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर सीधे निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार, कार्रवाई और किसानों के हितों को लेकर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कृषि विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए लिखा कि यदि छापेमारी करने वाली टीम के सदस्य ही कथित रूप से कमीशनखोरी के खेल में शामिल होंगे तो ऐसी कार्रवाई का औचित्य क्या रह जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले छापेमारी की जाती है और बाद में कथित तौर पर समझौते एवं सौदेबाजी के जरिए रकम वसूलने की कोशिश होती है। डोटासरा ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि कथित भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग के आरोपों पर सरकार और कृषि मंत्री की ओर से अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

डोटासरा के आरोपों पर कृषि मंत्री डॉ.किरोड़ी लाल मीणा ने भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि डोटासरा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी आरोप सिद्ध कर दें तो वह तत्काल मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। मीणा ने कहा कि वह जीवनभर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का प्रश्न ही नहीं उठता।

कृषि मंत्री डॉ.किरोड़ी लाल मीणा ने आगे कहा कि डोटासरा व्यक्तिगत दुर्भावना के चलते उन पर तथ्यहीन और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीकर केवल डोटासरा का ही नहीं बल्कि उनका भी क्षेत्र है और वहां किसानों के हितों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है। मीणा ने यह भी कहा कि हमला केवल डिकॉय टीम पर नहीं बल्कि सरकार की व्यवस्था और कानून के शासन पर हमला है। उन्होंने विपक्ष से हमलावरों का समर्थन नहीं करने और निष्पक्ष जांच में सहयोग करने की अपील की।

सीकर की इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस सरकार की कार्रवाई और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार इसे प्रशासनिक कार्रवाई में बाधा और कानून व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है। अब इस पूरे विवाद में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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