Friday, 05 June 2026

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दावा: 2020 में राजस्थान सरकार गिराने के लिए विधायकों को दिए गए थे 10 करोड़ एडवांस


पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दावा: 2020 में राजस्थान सरकार गिराने के लिए विधायकों को दिए गए थे 10 करोड़ एडवांस

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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर जुलाई 2020 के सियासी संकट को लेकर भाजपा और विरोधियों पर निशाना साधा है। गहलोत ने कहा- सरकार गिराने के लिए हर विधायक का 35 करोड़ का सौदा राजस्थान सहित हुआ था। लोगों को एडवांस्ड दे दिए थे। 10 करोड़ एडवांस दे दिए थे, वापस नहीं लिए। देश में क्या हो रहा है, कोई बोल नहीं रहा है।  

जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने दावा किया कि उस समय राजस्थान की कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए बड़े स्तर पर हॉर्स ट्रेडिंग की कोशिश की गई थी और विधायकों को करोड़ों रुपये के ऑफर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उस राजनीतिक संकट का मुकाबला करते हुए सरकार को बचाने में सफलता हासिल की थी।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि उस समय लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए थे, लेकिन कांग्रेस ने एकजुटता दिखाते हुए उस साजिश को विफल कर दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री  गहलोत ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति सरकारें गिराने और विधायकों की खरीद-फरोख्त पर आधारित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भी ऐसा ही प्रयास किया गया था। गहलोत ने दावा किया कि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार गिराने के प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने कहा कि उस समय कुछ विधायकों की बैठकें भी दिल्ली में आयोजित की जाती थीं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी कांग्रेस नेतृत्व को थी।

गहलोत ने कहा कि भाजपा की ओर से विधायकों को लाने-ले जाने के लिए विशेष विमान तक भेजे गए थे, लेकिन परिस्थितियां बदलने पर यह प्रयास सफल नहीं हो सके। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को यह आशंका होने लगी थी कि कहीं उनके अपने विधायक ही प्रभावित न हो जाएं, जिसके बाद रणनीति बदल दी गई।

पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि उन्हें वहां भी इसी तरह की राजनीतिक गतिविधियों की आशंका नजर आती है। उन्होंने कहा कि देश में भय और दबाव का माहौल बन रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

राजनीति में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर टिप्पणी करते हुए गहलोत ने कहा कि किसी भी नेता को आगे बढ़ने के लिए अपनी क्षमता और कार्यशैली को मजबूत करना चाहिए, न कि दूसरों को कमजोर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में जनता के बीच जाकर काम करने, गरीबों, वंचितों और अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों से जुड़ने की परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

अपने राजनीतिक जीवन पर संतोष व्यक्त करते हुए गहलोत ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक जीवन में बहुत अवसर मिले और गांधी परिवार का उन पर हमेशा विश्वास रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें जीवन में सब कुछ मिला है और अब उनकी अपेक्षा है कि नई पीढ़ी देश की मजबूती और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित होकर कार्य करे।

राज्य सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर टिप्पणी करते हुए गहलोत ने कहा कि राज्य में निर्णय प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को उनकी शुभकामनाओं के साथ-साथ सुझाव और आलोचनाएं भी स्वीकार करनी चाहिए। लोकतंत्र में सकारात्मक आलोचना को स्वीकार करना शासन व्यवस्था को और बेहतर बनाता है।

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