



जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रमुख एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए एक विवादित भूमि धोखाधड़ी प्रकरण को लेकर 10 तीखे सवाल पूछे हैं। बेनीवाल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से एक विस्तृत पोस्ट साझा कर सरकार की कथित 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल उठाए हैं।
यह पूरा मामला प्रमोद शर्मा नामक व्यक्ति से जुड़ा बताया जा रहा है, जिस पर भूमि संबंधी धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े मुकदमे दर्ज होने का दावा किया गया है। बेनीवाल का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति स्वयं को मुख्यमंत्री का करीबी या रिश्तेदार बताता है, जिसके कारण उसके खिलाफ कार्रवाई में देरी हो रही है।
सांसद बेनीवाल ने अपने पहले सवाल में पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि प्रदेश में सामान्य नागरिकों के खिलाफ छोटे मामलों में भी पुलिस त्वरित कार्रवाई करती है, लेकिन प्रमोद शर्मा के मामले में कानून की गति धीमी क्यों पड़ गई है। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसा कौन सा कारण है कि गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी अब तक गिरफ्तारी से बचा हुआ है।
अपने दूसरे सवाल में उन्होंने न्यायिक पहलू को उठाते हुए कहा कि यदि संबंधित मामले में उच्च न्यायालय आरोपी को राहत देने से इनकार कर चुका है, तो सरकार जनता को यह बताए कि उसकी गिरफ्तारी कब तक सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद भी कार्रवाई लंबित क्यों है।
तीसरे और चौथे सवाल में बेनीवाल ने आरोपी की कथित फरारी और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि यदि आरोपी वास्तव में फरार है, तो क्या उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए उस पर इनाम घोषित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि इनाम घोषित नहीं किया गया है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं।
भाजपा सरकार के सुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी दावों पर निशाना साधते हुए बेनीवाल ने पांचवें सवाल में पूछा कि क्या कानून की समानता केवल विपक्षी नेताओं और आम नागरिकों तक सीमित है या फिर सत्ता से जुड़े लोगों पर भी समान रूप से लागू होती है। उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि सरकार के लिए सभी नागरिक बराबर हैं या नहीं।
अपने छठे सवाल में सांसद ने नैतिकता का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या व्यक्तिगत रिश्ते और राजनीतिक प्रभाव अब कानून से भी ऊपर हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कथनी और करनी में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।
सातवें और आठवें सवाल में बेनीवाल ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर संभावित राजनीतिक दबाव की आशंका जताई। उन्होंने पूछा कि क्या किसी स्तर पर अधिकारियों को मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि कुछ लोगों को कानूनी कार्रवाई से बचाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि आरोपी कोई साधारण नागरिक, किसान, दलित या पिछड़े वर्ग का व्यक्ति होता, तो अब तक उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो चुकी होती।
नौवें सवाल में उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब आरएलपी कार्यकर्ताओं पर ज्ञापन देने जैसी घटनाओं में तत्काल मुकदमे दर्ज कर इनाम घोषित किए जा सकते हैं, तो फिर भूमाफिया के खिलाफ ऐसी तत्परता क्यों दिखाई नहीं देती। उन्होंने इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
अपने दसवें और अंतिम सवाल में बेनीवाल ने तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए पूछा कि क्या कुछ प्रभावशाली लोगों को कानून से बचाने के लिए कोई विशेष संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं है तो सरकार को स्पष्ट रूप से कार्रवाई कर जनता का विश्वास कायम करना चाहिए।
बेनीवाल की इस पोस्ट के बाद राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।