



जयपुर।अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में फर्जी बैंक खातों और फर्जी स्कूलों के माध्यम से करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि हड़पने के मामले में राजस्थान सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। नौगांव क्षेत्र में नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (एनएसपी) के जरिए सामने आए इस कथित घोटाले को लेकर प्रशासन और पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव ने उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक आयोजित कर संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त शासन सचिव, संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में अब तक की जांच, दर्ज मुकदमों और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जहां भी फर्जीवाड़ा या अनियमितता सामने आए, वहां तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में संदिग्ध बैंक खातों, छात्रवृत्ति आवेदनों और कथित रूप से शामिल शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका की गहन जांच पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी चेतावनी दी है। अधिकारियों से कहा गया है कि जांच में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। पूरे प्रकरण की प्रगति की निगरानी सीधे उच्च स्तर पर की जाएगी।
मुख्य सचिव ने जांच एजेंसियों को अगले 15 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मामले की दोबारा समीक्षा की जाएगी और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस संबंध में साइबर थाना प्रभारी रामनिवास मीणा ने बताया कि शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक विभाग की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। संबंधित अधिकारियों के बयान लिए जा चुके हैं तथा जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज भी एकत्र किए गए हैं।
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी महेश मेहता ने बताया कि संदिग्ध बैंक खातों की विस्तृत जानकारी बीकानेर मुख्यालय से मांगी गई है। जानकारी प्राप्त होते ही उसे पुलिस और साइबर सेल को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि धन के प्रवाह और लाभार्थियों की वास्तविकता की जांच की जा सके।
प्रशासन का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद छात्रवृत्ति योजना में हुए संभावित वित्तीय अनियमितताओं और इसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।