



नागौर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा व्यवस्था में राज्य सरकार ने बदलाव किया है। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट से तैनात तीन पीएसओ को उनकी सुरक्षा ड्यूटी से हटा दिया गया है। अब उनकी सुरक्षा मुख्य रूप से नागौर जिला पुलिस के जवानों के जिम्मे रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था में किए गए इस बदलाव के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
सुरक्षा में कटौती को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने कभी अतिरिक्त सुरक्षा की मांग नहीं की थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हजारों युवा और समर्थक हमेशा उनके साथ खड़े रहते हैं और वही उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक कारणों से इस तरह के फैसले ले रही है।
गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पहले खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट और सुरक्षा संबंधी अलर्ट के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। उसी दौरान जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के पीएसओ उनकी सुरक्षा में लगाए गए थे। अब इन अधिकारियों को हटाए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में भैराणा धाम आंदोलन के दौरान दिए गए बेनीवाल के बयानों और सरकार के साथ बढ़ते टकराव के बीच इस फैसले को देखा जा रहा है। बिचून रीको औद्योगिक क्षेत्र के विरोध में आयोजित "रीको भगाओ, भैराणा धाम बचाओ" आंदोलन के दौरान बेनीवाल ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखे हमले किए थे, जिसके बाद भाजपा और आरएलपी के बीच बयानबाजी और अधिक तेज हो गई थी।
भैराणा धाम में आयोजित महापंचायत के दौरान बेनीवाल ने भाजपा सरकार पर साधु-संतों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सनातन संस्कृति और संत समाज के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार संतों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। उनके बयानों को लेकर भाजपा नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और राजनीतिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दल इसे सरकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।