



जयपुर। राजस्थान में नवगठित आठ जिलों को लेकर जारी एक प्रशासनिक आदेश अब विवादों में आ गया है। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी आदेश में इन जिलों में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद पर राजस्थान ग्रामीण विकास सेवा (RDS) के अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
इस फैसले के खिलाफ राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताते हुए ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को पत्र लिखकर आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।
आरएएस एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा कि राज्य गठन के समय से ही जिला परिषद सीईओ का पद प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और यह परंपरागत रूप से आरएएस/आईएएस कैडर के अंतर्गत आता रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में राज्य के 33 जिलों में सीईओ के कुल 33 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 25 पद आईएएस और 8 पद आरएएस अधिकारियों के लिए निर्धारित हैं।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि नए जिलों में सीईओ पदों को RDS सेवा के तहत सृजित करते समय कार्मिक विभाग की सहमति नहीं ली गई और न ही पंचायत राज विभाग की आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया गया।
ग्रामीण विकास विभाग ने हाल ही में आठ नवगठित जिलों डीग, बालोतरा, खैरथल-तिजारा, सलूम्बर, फलौदी, कोटपूतली-बहरोड़, ब्यावर और डीडवाना-कुचामन—में कुल 88 पदों के सृजन का आदेश जारी किया है। इनमें सीईओ के साथ-साथ अतिरिक्त सीईओ, परियोजना अधिकारी (लेखा), सहायक लेखाधिकारी, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, स्टेनो, सूचना सहायक, वरिष्ठ सहायक और 24 कनिष्ठ सहायक पद शामिल हैं।
आरएएस एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से न केवल आरएएस अधिकारियों के प्रमोशन के अवसर सीमित होंगे, बल्कि राज्य की प्रशासनिक कैडर संरचना पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
एसोसिएशन ने आदेश संख्या 1953 को निरस्त करते हुए मांग की है कि नए जिलों में भी सीईओ पद पहले की तरह आरएएस कैडर के तहत ही सृजित किए जाएं। यह मामला अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर बहस का विषय बन गया है। आने वाले समय में सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।