Sunday, 26 April 2026

राजस्थान हाईकोर्ट में पहली बार 39 जज एक साथ बैठे, वकीलों के बहिष्कार पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने जताई नाराजगी


राजस्थान हाईकोर्ट में पहली बार 39 जज एक साथ बैठे, वकीलों के बहिष्कार पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने जताई नाराजगी

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच के इतिहास में शनिवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब संभवत: पहली बार सभी 39 न्यायाधीश एक साथ सुनवाई के लिए बैठे। हालांकि यह ऐतिहासिक पल वकीलों के स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार की वजह से फीका पड़ गया, क्योंकि विरोध के चलते एक भी अधिवक्ता कोर्ट में पेश नहीं हुआ।

शनिवार को वर्किंग डे घोषित किए जाने के विरोध में हाईकोर्ट की विभिन्न बार एसोसिएशनों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान किया था। ऐसे में कोर्ट रूम्स में जज तो मौजूद रहे, लेकिन वकीलों की अनुपस्थिति के कारण अधिकांश मामलों में सुनवाई प्रभावित रही। इस पर जस्टिस एस. पी. शर्मा की लार्जर बेंच ने नाराजगी जाहिर की। बेंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों को यह पता चलना चाहिए कि जज उनके मामलों की सुनवाई के लिए तैयार बैठे हैं, तो वकीलों को इसमें क्या आपत्ति हो सकती है।

बेंच ने कहा कि वकील भी कोर्ट ऑफिसर होते हैं और न्यायिक प्रक्रिया को सुचारू रखना उनका दायित्व है। लेकिन आज न तो वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित हुए और न ही राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता उपस्थित हुए। बेंच ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार ने भी एडवोकेट जनरल को उपस्थित नहीं होने की सलाह दी है?

कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक कार्य को रोकने का यह तरीका उचित नहीं है। खास बात यह रही कि शनिवार को ही भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी जयपुर में मौजूद थे। एक मामले की सुनवाई के दौरान आदेश लिखवाते हुए बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर ने वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दिया था कि वकील कार्य बहिष्कार पर नहीं जाएंगे। इसके बावजूद बहिष्कार किया जा रहा है और अधिवक्ताओं पर कोर्ट में उपस्थित नहीं होने का दबाव बनाया जा रहा है।

बेंच ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और पदाधिकारियों को अपने फैसले की समीक्षा करने की सलाह दी। साथ ही आदेश की प्रति तीनों बार एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजने के निर्देश दिए गए।

इधर, बार और बेंच के बीच बढ़ते टकराव के बीच राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का राजस्थान से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की है। पत्र में कहा गया कि बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो पहिए हैं, जिनके समन्वय से ही न्यायिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलती है, लेकिन वर्तमान में यह संतुलन बिगड़ रहा है। यह विवाद पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में आयोजित हाईकोर्ट की पूर्णपीठ बैठक से शुरू हुआ था, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति में वर्ष 2026 से प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने का फैसला लिया गया था। इसके बावजूद हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्ष 2026 में कुल 17 शनिवार कार्यदिवस घोषित किए हैं। इनमें 24 जनवरी, 7 फरवरी, 21 फरवरी, 7 मार्च, 25 अप्रैल, 2 मई, 16 मई, 4 जुलाई, 18 जुलाई, 1 अगस्त, 22 अगस्त, 5 सितंबर, 26 सितंबर, 31 अक्टूबर, 21 नवंबर, 5 दिसंबर और 19 दिसंबर को सुनवाई निर्धारित है।अब यह देखना होगा कि बार एसोसिएशन अपने बहिष्कार के फैसले पर पुनर्विचार करती है या बार और बेंच के बीच यह टकराव और गहराता है।

Previous
Next

Related Posts