



जयपुर। राजस्थान कैडर के वर्ष 2024 बैच के भारतीय वन सेवा के 7 प्रोबेशनर अधिकारियों के एक दल ने गुरुवार को राजस्थान पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र में भाग लिया। यह संवाद न केवल उनके प्रशिक्षण का अहम हिस्सा रहा, बल्कि वन विभाग और पुलिस विभाग के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
संवाद के दौरान डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने वन संरक्षण से जुड़े कानूनों, वन क्षेत्रों में होने वाले अपराधों, नवीन आपराधिक कानूनों और कानून-व्यवस्था की व्यापक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वन विभाग और पुलिस के बीच मजबूत तालमेल पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने के साथ-साथ अवैध खनन, वन भूमि पर अतिक्रमण और वन्यजीव अपराध जैसे संवेदनशील मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
बैठक में अधिकारियों को पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रणनीतियों और अपराध नियंत्रण के व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं IFS प्रोबेशनर्स ने वन संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों के समाधान के लिए बहु-विभागीय सहयोग बेहद जरूरी है। इस अवसर पर विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि दोनों सेवाओं के बीच निरंतर संवाद और सूचनाओं के आदान-प्रदान से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। जमीनी स्तर पर संयुक्त कार्रवाई से न केवल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और बेहतर प्रशासनिक परिणाम भी सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने प्रोबेशनर्स को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में पुलिस के साथ सतत समन्वय बनाए रखने की सलाह दी, ताकि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल सुशासन की कुंजी है। शिखा मेहरा के नेतृत्व में पहुंचे IFS अधिकारियों ने भी साझा जिम्मेदारियों वाले क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर सहमति जताई।
इस संवाद सत्र में पुलिस मुख्यालय से संजय अग्रवाल, अनिल पालीवाल, एडीजी वी.के. सिंह, बिपिन पाण्डे, हवासिंह घुमरिया, एस. सेंगाथिर, रूपिंदर सिंघ और कुंवर राष्ट्रदीप सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। यह संवाद प्रशासनिक समन्वय और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।