



बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को दी गई Z+ सुरक्षा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि RSS एक गैर-पंजीकृत संगठन है, इसलिए केंद्र सरकार करदाताओं के पैसे से उसे सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती। साथ ही, याचिकाकर्ता ने RSS से खर्च की वसूली की मांग भी की थी।
मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे जनहित से जुड़ा न मानते हुए “प्रेरित याचिका” करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता द्वारा उचित शोध और तथ्यों के आधार पर मामला प्रस्तुत नहीं किया गया। सरकारी वकील देवेंद्र चौहान ने भी कोर्ट को बताया कि याचिका में जनहित का कोई ठोस आधार नहीं है और यह केवल अनुमान व आरोपों पर आधारित है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता ने PIL दाखिल करने से पहले पर्याप्त अध्ययन नहीं किया और इसमें कोई वास्तविक जनहित शामिल नहीं है।” कोर्ट ने यह भी माना कि याचिका तथ्यों के बजाय अटकलों पर आधारित है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह याचिका ललन किशोर सिंह ने अपने वकील के माध्यम से दायर की थी। इसमें यह भी दावा किया गया था कि सार्वजनिक धन का गलत उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने इन दावों को पर्याप्त आधारहीन मानते हुए याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया।