



जयपुर। महेश नगर थाना क्षेत्र में दर्ज बहुचर्चित हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और करोड़ों रुपये की कथित उगाही के मामले में आरोपी दिशा बाबला और धीरज कुमार को सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश रवि बाला सिंह ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश पारित किया।
मामला उस समय चर्चा में आया था जब परिवादी विमल डागा ने महेश नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसकी पूर्व इंटर्न दिशा बाबला, धीरज कुमार, करण बाबला तथा अन्य सहयोगियों ने मिलकर उसे लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और ब्लैकमेल कर बड़ी रकम की मांग की। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने झूठे दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने, परिवार को नुकसान पहुंचाने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक के माध्यम से अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी थी।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि परिवादी से अब तक करीब 90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं, जबकि आरोपी पक्ष द्वारा 50 लाख रुपये अतिरिक्त की मांग की जा रही थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी उसके एआई प्रोजेक्ट पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते थे और इसी उद्देश्य से सोशल मीडिया, ई-मेल तथा अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
पुलिस जांच के दौरान प्राप्त तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कार्रवाई करते हुए पहले दिशा बाबला को जोधपुर से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद महेश नगर थाना पुलिस ने मामले के कथित मास्टरमाइंड बताए जा रहे धीरज कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच अभी जारी है।
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता ललित शर्मा ने न्यायालय में कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि एक संगठित षड्यंत्र और कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़ा प्रतीत होता है। उन्होंने दलील दी कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं और आगे भी नए खुलासों की संभावना है, इसलिए आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने भी आरोपों की गंभीरता, जांच की स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश रवि बाला सिंह ने माना कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं तथा वर्तमान परिस्थितियों में आरोपियों को जमानत का लाभ देना उचित नहीं होगा।
न्यायालय द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद दिशा बाबला और धीरज कुमार फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में रहेंगे। वहीं पुलिस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका, डिजिटल साक्ष्यों और कथित नेटवर्क की गतिविधियों की भी गहन जांच कर रही है।