



जयपुर के शास्त्री नगर स्थित अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा भवन में समाज के राष्ट्रीय संत सुंदरदास जी महाराज की 430 वीं जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर महासभा भवन परिसर में स्थापित संत सुंदरदासजी बलरामदासजी मंदिर को फूल मालाओं से सजाया गया तथा विधिवत पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र गुप्ता तूंगावाला, मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष संजीव कुमार कट्टा सहित समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, संरक्षक एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
इस दौरान उपस्थित समाजबंधुओं ने संत सुंदरदास के जीवन, विचार और योगदान पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने बताया कि संत सुंदरदास जी (विक्रम संवत 1653–1746) भक्तिकाल के एक महान संत-कवि थे, जिन्हें उनकी विद्वता के कारण हिंदी साहित्य का ‘शंकराचार्य’ भी कहा जाता है। उन्होंने संस्कृत, दर्शन और व्याकरण का गहन अध्ययन किया था और उनकी प्रसिद्ध रचना ‘सुन्दरविलास’ में ज्ञान और भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। अन्य निर्गुण संतों की तुलना में वे अत्यधिक शिक्षित और विद्वान थे, जिनकी शिक्षाएं आज भी समाज को मार्गदर्शन देती हैं।
कार्यक्रम के अंत में समाज के सदस्यों ने संत सुंदरदास जी के आदर्शों को अपनाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।