



राजस्थान हाईकोर्ट ने हनीट्रैप और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जेल में बंद एक गर्भवती महिला कैदी को राहत प्रदान करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने महिला को प्रसव के लिए जेल से बाहर रहने हेतु तीन महीने की सशर्त अंतरिम जमानत मंजूर की है। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने सारिका खानम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए यह मांग की गई थी कि महिला अपने बच्चे को जेल के बाहर सुरक्षित वातावरण में जन्म देना चाहती है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए महिला को निर्देश दिया कि वह 26 जून को पुनः जेल अधीक्षक के समक्ष सरेंडर करे और इस अवधि के दौरान किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल न हो।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि सारिका खानम 15 जुलाई 2025 से अलवर में दर्ज मामले में जेल में बंद हैं और वर्तमान में लगभग 34 सप्ताह की गर्भवती हैं। सरकारी पक्ष द्वारा जांच अधिकारी के माध्यम से गर्भावस्था की पुष्टि किए जाने के बाद कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने का फैसला किया। इस आदेश को मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने महिला और नवजात के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए राहत प्रदान की है।