



जयपुर। पैरोल से जुड़े मामलों में बिना पर्याप्त आधार के नकारात्मक रिपोर्ट देने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित अधिकारियों पर लागत (कोस्ट) लगाई जाएगी और यह राशि उन्हीं से वसूली जाएगी।
सुनवाई के दौरान एसीएस होम भास्कर ए. सांवत और डीजीपी राजीव शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। डीजीपी ने अदालत में स्वीकार किया कि करीब 40 प्रतिशत मामलों में बिना ठोस आधार के मशीनरी तरीके से नकारात्मक रिपोर्ट दे दी जाती है। हालांकि उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही नहीं होगी और मामलों की बारीकी से जांच कर नियमों के अनुरूप निर्णय लिए जाएंगे।
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पैरोल मामलों में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और जेल प्रशासन की राय को गंभीरता से लिया जाए और हर मामले में स्वतंत्र रूप से विचार कर निर्णय किया जाए। अधिकारियों के आश्वासन के बाद कोर्ट ने संबंधित दोनों याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
इससे पहले पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने भरतपुर कलेक्टर और एसपी को फटकार लगाते हुए कहा था कि “आप लोगों ने कोर्ट को पोस्ट ऑफिस समझ रखा है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों के इस रवैये के कारण अदालतों में पैरोल से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ रही है, जिससे जरूरी मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ताओं ने पैरोल खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें पैरोल देने के निर्देश दिए थे।