



जयपुर। राजस्थान में छोटी बजरी लीजों के जरिए अवैध खनन और परिवहन का बड़ा खेल सामने आया है। खान विभाग द्वारा गड़बड़ी रोकने के लिए शुरू की गई ई-रवन्ना और ट्रांजिट पास प्रणाली में भी बजरी माफिया ने सेंध लगा दी है। जानकारी के अनुसार स्टॉक कांटों पर एक ही ट्रक को खड़ा कर फर्जी तरीके से कई ई-रवन्ने और ट्रांजिट पास जारी किए जा रहे हैं। इस दौरान ट्रकों की नंबर प्लेट में मामूली बदलाव कर फर्जीवाड़ा किया गया, जिससे अवैध बजरी परिवहन को वैध दिखाया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक जोधपुर, बाड़मेर, पाली और जालोर सहित कई जिलों में रोजाना करीब 35 हजार टन बजरी की अवैध निकासी होने का अनुमान है। मोटे अनुमान के अनुसार इससे राज्य सरकार को हर साल करीब 101 करोड़ रुपये से अधिक की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है। मामला सामने आने के बाद खान विभाग के स्तर पर इसकी जांच शुरू हो गई है और इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।
जांच में सामने आया है कि कई ट्रकों की नंबर प्लेट के अंतिम एक या दो अंक बदलकर ई-रवन्ना जारी किए गए। कुछ मामलों में नंबर प्लेट पर कागज चिपकाकर भी फर्जी रवन्ने काटे गए। ट्रकों की तस्वीर, आसपास का दृश्य और वजन के आंकड़ों के मिलान से इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
इसके अलावा खनिज विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से कई वाहनों के लिए निर्धारित क्षमता से दोगुना तक ट्रांजिट पास जारी किए जाने के मामले भी सामने आए हैं। हालांकि इस पोर्टल की मॉनिटरिंग खनिज और परिवहन विभाग दोनों के पास है, फिर भी अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
अब विभाग इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है और फर्जी ई-रवन्ना तथा ट्रांजिट पास जारी करने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।