Tuesday, 10 March 2026

भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर सख्ती: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 50 से अधिक मामलों में कार्रवाई को दी मंजूरी


भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर सख्ती: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 50 से अधिक मामलों में कार्रवाई को दी मंजूरी

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जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भ्रष्टाचारमुक्त और पारदर्शी प्रशासन के लिए सख्त कदम उठाते हुए अभियोजन स्वीकृति, धारा 17-ए और विभागीय जांच से जुड़े 50 से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। मुख्यमंत्री ने जनहित के कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए लोक सेवकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को मंजूरी दी है।

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने निजी व्यक्तियों को गैरकानूनी तरीके से लाभ पहुंचाने के आरोपों में तत्कालीन उपखंड अधिकारी (SDO) सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के दो अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है।

इसके अलावा न्यायालय से दोषसिद्ध होने के आधार पर कृषि उपज मंडी समिति के तत्कालीन सचिव को राज्य सेवा से पदच्युत किया गया है। वहीं लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के कारण एक अन्य अधिकारी को भी राजकीय सेवा से हटा दिया गया। मुख्यमंत्री ने पद के दुरुपयोग, अनियमित भुगतान और राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में एक तत्कालीन विकास अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच की स्वीकृति भी दी है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक अधिकारी के खिलाफ दो मामलों में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के परामर्श से दंड की मात्रा बढ़ाने का भी अनुमोदन किया है। साथ ही राज्य सेवा के अधिकारियों से जुड़े सीसीए नियम-16 के तहत गंभीर आरोपों के 23 मामलों में 27 अधिकारियों को दो से चार वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने की सजा दी गई है।

इसके अतिरिक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों के पांच मामलों में पेंशन रोकने का अनुमोदन किया गया है, जबकि नौ अन्य मामलों में जांच निष्कर्षों को मंजूरी देकर उन्हें राज्यपाल को अग्रेषित किया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य सेवा अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत पांच अपीलों में से चार को खारिज करते हुए एक मामले में दंड की मात्रा कम करने का निर्णय लिया।

सरकार ने एक मामले में अभियोजन स्वीकृति के बजाय विभागीय जांच के आदेश दिए, जबकि दो मामलों में अभियोजन से इनकार करते हुए विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। वहीं तीन विभागीय जांच मामलों में अधिकारियों को दोषमुक्त भी किया गया है।

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